कक्षा 12 के एक छात्र सार्थक सिद्धांत ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओएसएम टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
उन्होंने ऐसी विसंगतियों को उजागर किया है, जो किसी विशेष सेवा प्रदाता के प्रति पक्षपातपूर्ण व्यवहार की ओर संकेत करती हैं। सार्थक ने एक ब्लॉग में कई सीबीएसई निविदा दस्तावेजों की तुलना करते हुए यह सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि उम्मीद है सीबीएसई मेरे सवालों का जवाब देगा।
छात्र ने कहा, “इसमें कई कमियां थीं। मैंने बस दोनों की तुलना की हैं। कम से कम 15 कमियां थीं। मैं उनमें से तीन या चार को खास तौर पर बताना चाहूंगा।”
उन्होंने ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ टेंडर प्रक्रिया की ओर इशारा किया और कहा कि सीबीएसई ने तीन अलग-अलग टेंडर जारी किए थे। पहला टेंडर जीईएम पोर्टल से हटा दिया गया, दूसरे टेंडर के तकनीकी मूल्यांकन में सभी बोली लगाने वाले असफल रहे और तीसरा टेंडर आखिरकार एक एडुटेक कंपनी को दे दिया गया।
उन्होंने कहा, “पुराने टेंडर में खराब प्रदर्शन से जुड़ी तीन शर्तें थीं, यानी अगर सर्विस प्रोवाइडर का प्रदर्शन खराब रहता, तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता। लेकिन, नए आरएफपी में इन शर्तों को हटा दिया गया।”
उन्होंने ब्लैकलिस्टिंग, वित्तीय योग्यता की सीमाओं, सीएमएमआई स्तरों और प्रोजेक्ट के मानदंडों से जुड़े नियमों में हुए बदलावों पर भी रोशनी डाली, जिनके बारे में आरोप है कि उन्होंने इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनी टीसीएस के मुकाबले एडुटेक कंपनी को ज्यादा फायदा पहुंचाया। सिद्धांत ने चल रहे आनलाइन स्कैनिंग और मार्किंग सिस्टम पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ओएसएम अच्छा बदलाव है। लेकिन पहले इसकी व्यापक रूप से जांच होनी चाहिए। जैसा कि कई रिपोर्टों में बताया गया है इसकी व्यापक रूप से टेस्टिंग भी नहीं की गई।”