सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पर गुरुवार को संसद की मुहर लग गई। विपक्ष के वॉकआउट के बीच विधेयक राज्यसभा से भी ध्वनिमत से पारित हो गया।
पेपर लीक समेत परीक्षाओं में गड़बड़ियों की त्वरित जांच एवं मुकदमे के साथ ही सजा में सख्ती लाने वाले इस विधेयक को लोकसभा ने बुधवार को ही पारित कर दिया था। अब इस पर राष्ट्रपति की स्वीकृति ही बाकी रह गई है।
सरकार ने छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने की अपनी प्रतिबद्धता जताई, क्योंकि छात्र ही देश का भविष्य हैं।
विपक्ष ने कानूनी प्रविधानों को सुधार के लिए नाकाफी बताया
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए इसके प्रविधानों का ब्योरा दिया तो विपक्षी सांसदों ने बैठे-बैठे ही नारेबाजी और टिप्पणियां शुरू कर दीं। इस पर जितेंद्र सिंह ने चुटकी ली, ‘शायद तीर सही निशाने पर लगा है।’
विपक्ष ने कानूनी प्रविधानों को सुधार के लिए नाकाफी बताते हुए सरकार की नीयत पर प्रश्न खड़े किए। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से पांच प्रश्न पूछते हुए कहा कि गृह मंत्री इनका जवाब दें या इस्तीफा दें।
संशोधन विधेयक पर जैसे ही सात घंटे की चर्चा पूरी हुई, सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को जवाब देने के लिए बुलाया। लेकिन राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने सदन में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग कर दी।
विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया
सभापति ने इसे खारिज कर दिया तो कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया। इसके तुरंत बाद सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष पर गैरजिम्मेदार होने और संसदीय कार्यवाही, संसदीय लोकतंत्र या मर्यादा के प्रति कोई सम्मान नहीं रखने का आरोप लगाया।
चर्चा जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष ने विधेयक के प्रविधानों को ठीक से नहीं पढ़ा, जिन्हें बहुत सावधानी से तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह कानून कई तरह के अपराधों से व्यापक रूप से निपटता है, जिनमें प्रश्न-पत्र और उत्तर-कुंजी का लीक होना, उत्तर-पुस्तिकाओं व कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़, परीक्षा प्रक्रियाओं में हेराफेरी, नकली वेबसाइट व प्रवेश-पत्र बनाना और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल में मदद करने की संगठित कोशिशें शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह मुद्दा इतना व्यापक और गंभीर है कि इसे केवल सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार पहले से ही अपना काम कर रही है; वह ऐसा करती रहेगी। हम समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील करते हैं, हम सुझावों के लिए तैयार हैं। हम खुले मन से आगे बढ़ रहे हैं। हम न सिर्फ अपनी बात पर अमल करने को तैयार हैं, बल्कि हम उससे भी आगे बढ़कर काम करने को तैयार हैं।”
उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ प्रश्न-पत्र लीक होने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली सभी तरह की अनुचित गतिविधियों को रोकना है। यह सिर्फ एनटीए तक सीमित नहीं है; इसमें यूपीएससी, एसएससी और बैंकों सहित अन्य परीक्षाएं भी शामिल हैं।
राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट लागू नहीं करने के आरोप पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि असल में समिति की 76 प्रतिशत सिफारिशें पहले ही लागू की जा चुकी हैं।
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 152 बार पेपर लीक के दावे पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्होंने पंजाब और कर्नाटक में हुए पेपर लीक का जिक्र नहीं किया, जहां राजग की सरकार नहीं है।
एनटीए खत्म करने के सुझाव पर जितेंद्र सिंह ने बताया कि पेपर लीक की अधिक घटनाएं राज्य स्तरीय एजेंसियों, राज्य लोक सेवा आयोगों और राज्य सेवा बोर्डों के जरिये हुई हैं।
दावा किया कि 15 वर्ष पहले युवा देश छोड़कर जाने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन आज उनमें से कई लोग वापस आना चाहते हैं।
इससे पहले सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सदस्यों ने ‘गृह मंत्री सदन में आओ’ के नारे के साथ हंगामा शुरू कर दिया। इसके बावजूद जब सभापति ने कार्यवाही जारी रखी तो समूचा विपक्ष वॉकआउट कर गया, जो प्रश्नकाल में भी नहीं लौटा। दोपहर दो बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई तो जितेंद्र सिंह ने संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से कोई राज्य या दल अछूता नहीं है। इसकी सूची बहुत लंबी है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी परीक्षाओं को लेकर सरकार की जीरो टालरेंस की प्रतिबद्धता है, इसीलिए कानून को सख्त बनाया जा रहा है।
विधेयक की खास बातें
- अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 5-10 वर्ष की सजा और 50 लाख रुपये तक जुर्माना।
- संगठित अपराध में सजा 7-10 वर्ष होगी। 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना भी भरना होगा।
- सेवा प्रदाताओं पर पांच करोड़ रुपये जुर्माना। परीक्षा आयोजन पर आठ वर्ष तक रोक।
- सेवा प्रदाताओं के निदेशकों व प्रबंधन को 5-10 वर्ष सजा और पांच करोड़ रुपये जुर्माना।
- स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे। दो माह में जांच और आरोपपत्र की तिथि से तीन माह में ट्रायल।
- विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति होगी। जरूरत पर एसटीएफ या केंद्रीय एजेंसी से जांच।
विधेयक में सिर्फ आंकड़े बदले, इससे नहीं होगा सुधार : खरगे
राज्यसभा में गुरुवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने परीक्षा आयोजित करने वालों की जवाबदेही तय करने के लिए तंत्र बनाने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को संवैधानिक मान्यता देने और शिक्षा एवं भर्ती प्रणालियों में सुधार की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि इस विधेयक में सिर्फ आंकड़े बदले हैं। इससे सुधार नहीं होगा। फर्क तो इससे पड़ता है कि आप पेपर लीक के बिना परीक्षा कैसे कराते हैं।
खरगे ने आरोप लगाया कि 2024 में बने कानून में बदलाव की मांग कांग्रेस ने तभी की थी, लेकिन सरकार ने इसलिए नहीं मानी, क्योंकि तब राहुल गांधी छात्रों की आवाज देशभर में उठा रहे थे। उन्हें बदलाव का श्रेय मिल सकता था।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से सवाल पूछे
- लाठीचार्ज किसने किया, आंसू गैस किसने छोड़ी, पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया?
- सादे कपड़ों में छात्रों को पीटने वाले लोग कौन थे? दिल्ली पुलिस किसके अधीन है?
- सीआरपीएफ व आरएएफ किसके आदेश पर काम करती हैं?
- इस पूरे घटनाक्रम का सर्वोच्च सूत्रधार कौन था?
उन्होंने कहा कि देश इन सवालों का जवाब चाहता है। अगर गृह मंत्री इनके जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या प्रधानमंत्री उन्हें बर्खास्त करें। इस दौरान खरगे ने कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिन्हें कार्यवाही से निकालने की मांग करते हुए नेता सदन जेपी नड्डा ने खरगे को सलाह दी कि तर्क रखें, भावावेश में न आएं।
भाजपा के बृजलाल ने सपा को दिखाया आईना
समाजवादी पार्टी की ओर से सरकार की नीयत पर सवाल उठाए जाने का जवाब चर्चा के दौरान भाजपा सांसद बृजलाल ने दिया। उन्होंने 1992 में उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार द्वारा लाए गए नकल विरोधी अध्यादेश का उल्लेख किया। कहा कि उससे पहले एक सरकार में नकल का बोलबाला था।
सपा के एक बड़े नेता ने कहा था कि हमारी सरकार आई तो कोई छात्र फेल नहीं होगा। भाजपा सांसद ने दावा किया कि तब छात्र एक पार्टी के जिंदाबाद के नारे लगाते हुए धुआंधार नकल करते थे।
वहीं से नकल माफिया की शुरुआत हुई। नकल के लिए देशभर के छात्र उत्तर प्रदेश में परीक्षा देने आते थे। उत्तर प्रदेश नकल की राजधानी बन गया था।
हालांकि, सपा नेता प्रो. रामगोपाल यादव ने दावा किया कि बृजलाल की 90 प्रतिशत बातें गलत थीं, इसलिए उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। प्रो. यादव ने पार्टी की मांग दोहराई कि नीट को खत्म कर राज्यों को अधिकार दे देना चाहिए। केंद्र अपना 15 सीटों का कोटा रखे।
उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर नीट में इतनी जटिलताएं हैं कि शीर्ष पर बैठे व्यक्ति के लिए पेपर लीक रोकना बहुत मुश्किल होगा। उन्होंने बृजलाल पर यूं भी टिप्पणी की कि कांग्रेस के समय से ही मुलायम सिंह और सपा का विरोध करके उत्तर प्रदेश के नेता दिल्ली में अपनी राजनीति चमकाते रहे हैं।
किसने टिकट देकर छात्र आंदोलन में भेजे लोग, हो जांच : संजय झा
चर्चा के दौरान जनता दल (यूनाइटेड) के संजय कुमार झा ने कहा कि इस विषय को राजनीतिक लाभ-हानि के तराजू पर नहीं तौला जाना चाहिए, क्योंकि पेपर लीक की समस्या नई नहीं है। यह एक राष्ट्रीय चुनौती है।
उन्होंने गत दिवस लोकसभा में प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा मद्रास आइआइटी के प्रो. वी. कामकोटि पर की गई टिप्पणी पर बिना नाम लिए कटाक्ष किया कि जिस खानदान की तीन-चार पीढ़ियों का उच्च शिक्षा से खास नाता नहीं रहा, वह भी आइआइटी मद्रास पर टिप्पणी कर रहे हैं।
साथ ही संजय झा ने दावा किया कि उन्होंने एक मलयाली चैनल पर देखा कि 23 उद्योगपतियों ने टिकट देकर कुछ तत्वों को छात्र आंदोलन में शामिल होने के लिए भेजा था।
गृह मंत्री को इसकी जांच करानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को हाईजैक करने का प्रयास हुआ। उनकी टिप्पणी पर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा भी किया।