सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में एक अप्रैल को हुई सनसनीखेज घटना की जांच पूरी हो जाने पर एनआईए को आरोप-पत्र दाखिल करने की अनुमति दे दी है।
मालदा जिले में भीड़ ने तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों और एक पांच वर्षीय बच्चे को नौ घंटे से अधिक समय तक बिना भोजन-पानी के बंधक बनाकर रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
बंगाल, ओडिशा और झारखंड के लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को एसआइआर प्रक्रिया में मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की 60 लाख से अधिक आपत्तियों को निपटाने के लिए तैनात किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के एक पत्र का स्वत: संज्ञान लिया था, जिसमें एक अप्रैल की रात की भयानक घटना का विस्तृत ब्योरा दिया गया था।
बाद में शीर्ष अदालत के निर्देश पर चुनाव आयोग की शिकायत के आधार पर एनआइए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी।
शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ को एनआईए की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया कि जांच एजेंसी ने एक नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें अब तक की गई जांच का विवरण दिया गया है।
चार्जशीट फाइल करने की होगी पूरी आजादी
पीठ ने राजू की दलीलों पर गौर किया और कहा, ”एनआईए को सक्षम क्षेत्राधिकार वाली अदालत में आरोप-पत्र दाखिल करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।”
पीठ ने एनआईए को फिलहाल इस मामले में कोई और स्थिति रिपोर्ट दाखिल नहीं करने की भी अनुमति दे दी, जब राजू ने कहा कि जांचकर्ता पूरी तरह जांच में व्यस्त होंगे।
‘मामले को नतीजे तक पहुंचाया जाना चाहिए’
पीठ ने 13 अप्रैल को स्पष्ट कर दिया था कि बंगाल में एसआईआर में लगे न्यायिक अधिकारियों को दी गई सुरक्षा तब तक बनी रहेगी, जब तक विधानसभा चुनाव समाप्त नहीं हो जाते। इस सुरक्षा को इस अदालत की पूर्व अनुमति के बिना वापस नहीं लिया जा सकेगा।