मिडिल ईस्ट में फंसे यात्री सुरक्षित वापसी के लिए भारी खर्च उठाने को मजबूर, वैकल्पिक मार्गों के तहत लंबी दूरी कैब से तय कर रहे हैं…

अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मौत के बाद मिडिल ईस्ट में हवाई यात्रा बुरी तरह प्रभावित हो गई है।

इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया और कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इसके चलते कमर्शियल एयरलाइंस ने मिडिल ईस्ट में अपनी ज्यादातर रीजनल उड़ान सेवाएं रोक दी हैं।

इन घटनाओं का सबसे बड़ा असर खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख ट्रांजिट हब दुबई, अबू धाबी और दोहा पर पड़ा है। ये शहर अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के बड़े केंद्र माने जाते हैं, लेकिन एयरस्पेस बंद होने और सुरक्षा अलर्ट के कारण यहां से यात्रा लगभग ठप हो गई।

मिसाइल हमलों के बाद बढ़ा तनाव, हजारों यात्री फंसे

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइलों की कई खेप दागीं। इन हमलों के दौरान खाड़ी क्षेत्र के कई बड़े शहरों के ऊपर मिसाइलें और उन्हें रोकने के लिए दागे गए इंटरसेप्टर देखे गए।

दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे प्रमुख शहरों के आसपास आसमान में मिसाइलों और इंटरसेप्टर की गतिविधियों की वजह से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। कई देशों ने एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया।

एयरस्पेस बंद होने के कारण कई उड़ानें रद कर दी गईं या उन्हें दूसरे मार्गों पर मोड़ दिया गया। नतीजतन हजारों यात्री अलग-अलग एयरपोर्ट पर फंस गए और उन्हें अपनी यात्रा पूरी करने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं।

एयरपोर्ट बंद होने और फ्लाइट्स रुकने की वजह से कई लोगों को रेगिस्तानी रास्तों से लंबी सड़क यात्राएं करनी पड़ीं। कुछ यात्रियों को कई देशों की सीमाएं पार करनी पड़ीं, जबकि कई ने घर पहुंचने के लिए आखिरी समय में महंगे टिकट खरीदे।

दोहा में फंसी यात्री कैली मूर ने बताया हालात

इस अफरा-तफरी में फंसने वालों में कैली मूर भी शामिल थीं, जो केन्या में सफारी से लौटने के बाद दोहा में फंस गईं। वह बर्लिन जाने के लिए अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन उसी समय कतर ने अपने एयरस्पेस को बंद करने का फैसला कर लिया।

बताया गया कि उस समय आसमान में मिसाइलें गुजर रही थीं, जिसके कारण सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया। अचानक एयरस्पेस बंद होने से हजारों यात्री दोहा एयरपोर्ट पर फंस गए।

काफी देर तक एयरपोर्ट पर इंतजार करने के बाद मूर ने पास के एक होटल में चेक-इन किया। होटल स्टाफ ने सभी मेहमानों को सलाह दी कि वे कमरे के अंदर ही रहें और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें।

मूर ने ब्लूमबर्ग को बताया कि यह सच में बहुत अजीब स्थिति थी। सुबह जब उठते थे तो आसमान में मिसाइलों को इंटरसेप्ट होते हुए देख सकते थे।

जब उड़ानें शुरू होने की उम्मीद नहीं रही

कुछ समय बाद यह साफ हो गया कि हालात जल्द सामान्य नहीं होंगे और उड़ानें तुरंत शुरू होने की संभावना कम है। ऐसे में मूर ने कतर छोड़कर किसी दूसरे देश से उड़ान पकड़ने का फैसला किया।

उन्होंने कतर से सड़क मार्ग के जरिए सऊदी अरब जाने की योजना बनाई, क्योंकि वहां हवाई सेवाएं अभी भी संचालित हो रही थीं। इस यात्रा के लिए उन्होंने एक अन्य यात्री के साथ मिलकर एक ड्राइवर किराए पर लिया। दोनों ने करीब छह घंटे की सड़क यात्रा कर रियाद पहुंचने की योजना बनाई और इसके लिए लगभग 1000 डॉलर का भुगतान किया।

सोशल मीडिया की कहानियों से अलग था असली सफर

सोशल मीडिया पर कई इंफ्लुएंसर लग्जरी कारों और निजी जेट के जरिए इस क्षेत्र से निकलने की कहानियां साझा कर रहे थे, लेकिन मूर का अनुभव इससे बिल्कुल अलग था।

उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा काफी साधारण और थकाऊ थी। दोनों यात्रियों ने एक पुरानी टोयोटा कार में सफर किया। सीमा पार करते समय उन्हें कार और ड्राइवर बदलना पड़ा और रास्ते में पेट्रोल पंपों पर रुककर खाना खाना पड़ा। लंबी और थकाऊ सड़क यात्रा के बाद आखिरकार वे सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचीं।

रियाद से लंदन के रास्ते पहुंचीं घर

रियाद पहुंचने के बाद मूर ने ब्रिटिश एयरवेज की एक फ्लाइट बुक की, जो लंदन के रास्ते उनके घर तक जाने वाली थी। इस नई यात्रा व्यवस्था के लिए उन्हें करीब 2000 डॉलर अतिरिक्त खर्च करने पड़े। मूर का अनुभव उन हजारों यात्रियों की स्थिति को दर्शाता है, जो अचानक पैदा हुए इस संकट के कारण मिडिल ईस्ट के अलग-अलग शहरों में फंस गए।

इनमें दुबई में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने आए कई यूरोपीय अधिकारी और खिलाड़ी भी शामिल थे, जिन्हें एयरस्पेस बंद होने और उड़ानों के रद होने के कारण अपनी यात्रा योजनाएं बदलनी पड़ीं।

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