इंदौर में स्वास्थ्य संकट की आहट: भागीरथपुरा के भूमिगत जल में खतरनाक मलजनित बैक्टीरिया मिला, प्रशासन अलर्ट…

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा मोहल्ले में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच दूषित जल से हुई 36 मौतों के बाद गठित स्वास्थ्य विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) को सौंप दी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भागीरथपुरा के भूमिगत जल तक मलमूत्र में पाया जाने वाला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया पहुंच गया है। इससे पहले, उच्च न्यायालय में पेश एक रिपोर्ट में बताया जा चुका है कि भागीरथपुरा से लिए गए पेयजल के 52 नमूनों में से 50 में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिले।

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि बीमारी फैलने का सबसे बड़ा कारण नगर निगम की जलापूर्ति लाइन में सीवर के पानी का मिलना था। प्रभावित लोगों ने पानी के स्वाद और गंध में बदलाव की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते नगर निगम के अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की।

बृहस्पतिवार को पेश रिपोर्ट में बताया गया कि विशेषज्ञ समिति ने घटना के तीन महीने बाद अलग-अलग स्रोतों के 43 नमूने लिए थे। उनमें से 10 नमूने नर्मदा पाइपलाइन के थे। इसमें ई-कोलाई नहीं मिला।

यही पानी भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जाता है। पास की कान्ह नदी के तीन नमूनों में ई-कोलाई की भारी मौजूदगी मिली। वहीं एक बोरवेल में भी ई-कोलाई की हानिकारक मात्रा पाई गई। इससे साफ हुआ कि भूमिगत जल तक खतरनाक बैक्टीरिया पहुंच चुका है।

इस रिपोर्ट के बाद, न्याधिकरण के सदस्य न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि जलापूर्ति व्यवस्था में हुई लापरवाही की कीमत आम लोगों ने अपनी जान देकर चुकाई है, इसलिए अब जिम्मेदारी तय किए बिना मामला नहीं छोड़ा जा सकता।

भागीरथपुरा कांड के बाद एनजीटी की केंद्रीय जोन पीठ के सामने रशीद नूर खान और कमल कुमार राठी ने जनवरी में अलग अलग याचिकाएं दायर की थीं। उसके बाद पीठ ने विशेषज्ञ समिति बनाकर जांच कराने का निर्देश दिया था। फिलहाल एनजीटी ने यह रिपोर्ट संबंधित पक्षों को भेजकर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।

भोपाल के यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के भूजल की फिर होगी वैज्ञानिक जांच
भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों की निगरानी कर रहे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास भूजल के अब भी दूषित होने के आरोपों को गंभीरता से लिया है।

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल को विशेषज्ञ समिति गठित कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से भूजल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट 13 अगस्त तक प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व विवेक जैन की युगलपीठ वर्ष 2004 से लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका स्व. आलोक प्रताप सिंह ने दायर की थी।

सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले अपशिष्ट के निष्पादन के बावजूद आसपास के कई वार्डों में भूजल के दूषित होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।

उनका कहना था कि इससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है।इन दावों को प्रथमदृष्टया गंभीर मानते हुए बृहस्पतिवार को युगलपीठ ने कहा कि वास्तविक स्थिति का पता केवल स्वतंत्र और वैज्ञानिक परीक्षण से ही लगाया जा सकता है।

इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल विशेषज्ञ समिति गठित कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पानी के नमूनों की जांच कराए और विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।

हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को निर्धारित की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। बता दें, यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले कचरे का पीथमपुर में वैज्ञानिक ढंग से निष्पादन किया जा चुका है।

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