सिया और चेतन की बढ़ीं मुश्किलें, 14 दिन की न्यायिक हिरासत; पॉलीग्राफ टेस्ट पर पुलिस ने नहीं दिया जोर…

पुणे की एक अदालत ने शुक्रवार को 25 वर्षीय पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के सिलसिले में सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

पुलिस ने उनकी हिरासत अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हो रही जांच के संबंध में कहा कि घटनास्थल पर मौजूद कुछ गवाह अब जानकारी देने के लिए आगे आए हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस ने गोयल और चौधरी की पॉलीग्राफ जांच की मांग नहीं की।

वहीं, मीडिया से बात करते हुए पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने कहा कि अपराध स्थल पर मौजूद कुछ अहम गवाह सामने आए हैं। उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। हमारे पास यह साबित करने के लिए सुबूत हैं कि हत्या हुई थी।

बीस वर्षीय सिया और 22 वर्षीय चेतन पर 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल को एक चट्टान से धक्का देकर हत्या करने का आरोप है। सिया और केतन की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी।

पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद दोनों आरोपितों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एएम विभूते के समक्ष पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने पुलिस हिरासत को तीन दिन बढ़ाने की मांग करते हुए तर्क दिया कि गोयल और चौधरी के मोबाइल फोन से बरामद डाटा में सांकेतिक भाषा में बातचीत शामिल थी। इस बातचीत को समझने के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को सूचित किया कि पुलिस ने उस स्थान पर पंचनामा किया था, जहां गोयल ने कथित तौर पर मुंबई जाते समय अग्रवाल का पासपोर्ट ठिकाने लगाया था।

सरकारी वकील राजश्री विरकुड ने कहा कि जांच करने वालों ने उस जगह का पंचनामा भी किया, जहां गोयल और चौधरी ने कथित तौर पर अग्रवाल की हत्या की रिहर्सल की थी।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने गोयल का एक और मोबाइल फोन बरामद किया है। उसे फरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पहले जब्त किए गए फोन से डाटा निकाला जा चुका है। जांच करने वालों को फारेंसिक रिपोर्ट मिल गई है। बरामद चैट में कोड वाली भाषा है, जिसमें निकनेम और इमोजी शामिल हैं, जिनका मतलब केवत आरोपित ही बता सकते हैं।

विरकुड ने कोर्ट को बताया कि दोनों आरोपितों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने और बरामद डिजिटल सुबूतों के संदर्भ की पुष्टि करने के लिए पूछताछ जरूरी थी।

हालांकि, गोयल के वकील विपुल दुशिंग ने इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस पहले ही जांच के लिए जरूरी इलेक्ट्रानिक डिवाइस और अन्य सामान जब्त कर चुकी है। दुशिंग ने कहा कि उनका मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।

चौधरी के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के पास आगे हिरासत की मांग करने के लिए कोई ठोस सुबूत नहीं है और वे संभावनाओं के आधार पर अंधेरे में तीर चलाने वाली जांच कर रहे हैं। दलीलें सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट एएम विभूते ने दोनों आरोपितों को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

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