मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण, इजरायल को निशाना बनाकर ईरान का हमला…

पश्चिम एशिया संघर्ष के रविवार को सौ दिन पूरे हो गए। दिनभर राजनीतिक बयानबाजी से जहां माहौल गरमाया रहा, वहीं देर रात ईरान ने इजरायल पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग दीं।

अप्रैल की शुरुआत में लागू हुए युद्धविराम के बाद से यह इस तरह का पहला हमला है, जिससे युद्ध समाप्त करने के लिए मध्यस्थता के प्रयास और जटिल हो गए हैं। इजरायल के शहरों में सायरन की आवाजें सुनी जा रही हैं।

लेबनान की राजधानी पर हमला नहीं करने के वाशिंगटन के अनुरोध को नजरअंदाज करते हुए इजरायल ने रविवार को बेरुत के दक्षिणी उपनगरों पर हमला किया, जिसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। दोनों देशों के बीच मामला बिगड़ते देख इस हमले की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को दे दी गई है।

रॉयटर के अनुसार, आइआरजीएस ने कहा है कि इजरायल तत्काल लेबनान पर हमला बंद करे। यदि उसने ईरानी कार्रवाई का विरोध किया, तो हम और तगड़ा हमला करेंगे।

लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि इजरायल के हमले में दो लोग मारे गए और 20 लोग घायल हुए।

इजरायली सेना ने कहा कि उसने हिजबुल्ला के ठिकानों पर इसलिए हमला किया, क्योंकि लेबनानी सशस्त्र समूह ने उत्तरी इजरायल को निशाना बनाकर गोलीबारी की थी। इससे पहले दिन में ट्रंप ने कहा था कि ईरान से या तो समझौता होगा या मैं उसे पूरी तरह से तबाह कर दूंगा। शांति समझौता होने से पहले मैं न तो ईरान की संपत्तियों को अनफ्रीज करूंगा और न ही कोई प्रतिबंध हटाऊंगा।

हालांकि, समझौते के बाद मैं इन कदमों पर विचार करूंगा। यदि हम तेहरान के साथ समझौता करने में सफल होते हैं, तो हम ईरान की परमाणु सामग्री को हासिल कर लेंगे और उसे नष्ट कर देंगे। अगर समझौता नहीं होता है, तो हम उसे सख्ती से बाहर निकालेंगे। हमें हर हाल में सुरक्षा चाहिए।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने कहा है कि अमेरिकी नाकेबंदी और इजरायल को लेबनान में हमले तेज करने की हरी झंडी देने से पश्चिम एशिया में अमेरिकी अड्डे और इजरायली ठिकाने हमारे निशाने पर आ गए हैं।

ईरान न सिर्फ बातचीत से हट जाएगा, बल्कि दुश्मनों का सीधा मुकाबला करेगा। वे न तो युद्धविराम के लिए प्रतिबद्ध हैं और न ही संवाद में विश्वास करते हैं। नौसैनिक नाकेबंदी और लेबनान से संबंधित समझौतों का उल्लंघन कर उन्होंने दिखाया है कि वे केवल ताकत की भाषा समझते हैं।

एएनआइ के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) ने शनिवार देर रात एक बयान में बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के दो हमलावर ड्रोन को मार गिराया, जो होर्मुज में मालवाहक जहाजों के लिए खतरा बन गए थे। सेंटकाम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “आज सुबह पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना ने होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को खतरे में डालने वाले दो ईरानी हमलावर ड्रोन को मार गिराया।”

एक दिन पहले भी दोनों ने एक-दूसरे पर हमले किए थे। ईरान ने शुक्रवार को होर्मुज और खाड़ी देशों की दिशा में ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए, जिन्हें अमेरिकी रक्षा प्रणालियों ने विफल कर दिया था।

इसके जवाब में अमेरिका ने उसके रडार समेत निगरानी ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका अब उन ईरानी संपत्तियों का उपयोग करने की तैयारी कर रहा है, जिन्हें प्रतिबंधों के तहत जब्त किया गया था। इस राशि से ईरान के हमलों के चलते खाड़ी देशों में हुए नुकसान की भरपाई की योजना बनाई जा रही है।

सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्काट बेसेंट ने एक टीम को ईरान के हमलों से सहयोगी खाड़ी देशों को हुए नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भविष्य में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए ईरानी संपत्ति के उपयोग पर विचार करेगा।

अराघची ने ट्रंप के दावे को किया खारिजएएनआइ के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने देश के सुप्रीम लीडर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात की संभावना को खारिज कर दिया है।

उन्होंने ट्रंप को वास्तविक दुनिया में रहने की सलाह दी। उनका यह बयान ट्रंप के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो भविष्य में ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से मुलाकात हो सकती है।

तेहरान गए पाकिस्तानी गृह मंत्रीप्रेट्र के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी तेहरान पहुंचे हैं। पाकिस्तानी मीडिया में यह दावा किया गया है कि अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता को फिर से शुरू कराने के प्रयास में नकवी ईरान के सर्वोच्च नेता के लिए एक संदेश लेकर गए हैं।

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