इजरायल में अक्टूबर में होने वाले चुनाव और नई सरकार के गठन से पहले गाजा की स्थिति में खास बदलाव संभव नहीं लग रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की शांति योजना को आगे बढ़ाने के लिए सोमवार को तेल अवीव में अमेरिकी वार्ताकार जेरेड कुश्नर और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की वार्ता बेनतीजा रहने से इस आशय के संकेत मिल गए थे। गाजा में बुधवार को 10 और उससे पहले मंगलवार को सात लोगों के मारे जाने के बाद पक्का हो गया कि अशांत फलस्तीनी क्षेत्र को लेकर इजरायल का रुख फिलहाल नहीं बदलने वाला है।
रायटर्स के अनुसार, बुधवार को गाजा सिटी के पुलिस मुख्यालय पर इजरायल के हवाई हमलों में नौ लोग मारे गए जबकि नुसीरत के शरणार्थी शिविर में एक आदमी मारा गया। इन हमलों में 15 लोग घायल हुए हैं। इजरायली सेना ने इन हमलों में हमास के लड़ाकों को निशाना बनाने की बात कही है।
इससे पहले मंगलवार को समुद्र के किनारे स्थित कैफे पर इजरायली हमले में सात लोग मारे गए थे। इजरायली सेना ने कहा है कि वहां पर चार हमास कमांडरों की बैठक को निशाना बनाकर हमला किया गया था। दोनों ही हमले कुश्नर की नेतन्याहू के साथ वार्ता के बाद हुए हैं। इस वार्ता से पहले कुश्नर की हमास प्रमुख खलील अल-हय्या के साथ काहिरा में वार्ता हुई थी।
उस वार्ता में हमास ने हथियार डालने के लिए इजरायली हमले तत्काल रोके जाने और इजरायली सेना की गाजा से वापसी की मांग रखी थी। ट्रंप के दामाद कुश्नर हमास की दोनों ही शर्तों से सहमत थे और उसके लिए नेतन्याहू को तैयार करने के लिए तेल अवीव आए थे लेकिन उनकी कोशिश नाकाम रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुश्नर और नेतन्याहू की वार्ता बेनतीजा रहने का सबसे बड़ा कारण अक्टूबर में इजरायल में होने वाला चुनाव है।
इस चुनाव से पहले नेतन्याहू बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि उनकी सरकार के कमजोर पड़ने और गाजा मसले पर नरम रुख अपनाने का संदेश जाए जबकि उनकी सरकार में शामिल कट्टरपंथी दल के नेता इत्मार बेनगिविर गाजा में प्रतिदिन 30-40 फलस्तीनियों को मारने की वकालत कर रहे हैं।
हिंद रजब और सहायता से जुड़े लोगों के मारे जाने की जांच
इजरायली अखबार हैरेट्ज के अनुसार, इजरायली सेना ने जनवरी 2025 में गाजा में मारी गई पांच वर्षीय फलस्तीनी बच्ची हिंद रजब और उसी वर्ष मार्च में आपातकालीन सेवा व सहायता सामग्री वितरण से जुड़े 15 कर्मियों को मारे जाने के मामले में जांच शुरू कर दी है।
इजरायली सेना ने बताया है कि इस जांच में कुल पांच घटनाओं को शामिल किया गया है। इनमें एक जांच अप्रैल 2024 में वर्ल्ड सेंट्रल किचेन के सात कर्मियों के मारे जाने की भी है। लेकिन मानवाधिकार संगठनों को इन जांचों से ठोस नतीजे की उम्मीद बहुत कम है।