SIR क्या है? भारत दुनिया को बताएगा इसके फायदे…

 नमतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दल भले ही चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, लेकिन चुनावी विश्वसनीयता को बढ़ाने वाली भारतीय चुनाव आयोग की यह पहल जल्द ही दुनियाभर के देशों में भी देखने को मिल सकती है।

चुनाव आयोग ने करीब दर्जनभर देशों की रुचि को देखते हुए अब इस पहल को चुनावी प्रबंधन निकायों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में साझा करने का फैसला लिया है।

यह सम्मेलन 21 से 23 जनवरी के बीच नई दिल्ली में होने जा रहा है। जिसमें दुनिया के करीब 70 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

मिली 50 देशों की सहमति

चुनाव आयोग से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस सम्मेलन के लिए अब तक करीब 50 देशों की सहमति भी मिल गई है। बाकी देशों की भी जल्द ही सहमति मिलने की संभावना है।

इस बीच आयोग चुनावी विश्वसनीयता को मजबूती देने और मतदाता सूची की विसंगतियों को दूर करने के लिए उठाए गए एसआईआर के कदम को इन देशों के साथ प्रमुखता से साझा भी करेगा।

इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया के सामने खड़ी चुनौतियों पर भी इन देशों के बीच मंथन होगा।

आयोग ने पिछले साल यानी जनवरी 2025 में भी ऐसा ही एक सम्मेलन आयोजित किया था। माना जा रहा है कि इस बार के सम्मेलन में और ज्यादा देशों की मौजूदगी रहेगी।

आयोग ने यह पहल तब की है, जब दुनिया के अधिकांश देश चुनावी विश्वसनीयता और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों के जूझ रहे हैं। ऐसे में भारत की मतदाता सूची को दुरुस्त करने की ये पहल सभी देशों को पंसद आ रही है।

क्या जानकारी मांगी गई?

सूत्रों के अनुसार, कुछ देशों के प्रतिनिधियों ने इसे लेकर जानकारी भी मांगी है। सम्मेलन में दुनियाभर के जो प्रमुख देश शामिल हो सकते हैं, उनमें फ्रांस, जर्मनी, जापान, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, ब्राजील सहित इंटरनेशनल आइडीइए से जुड़े 37 सदस्यों देशों के साथ ही नेपाल, भूटान, श्रीलंका और रूसी संघ जैसे देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।

गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मौजूदा समय में इंटरनेशनल आइडीइए के अध्यक्ष भी हैं।

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