चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक विवाद पर एनडीए के तीन प्रमुख सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग से जनता के सामने स्थिति साफ करने की मांग की है।
चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) का कहना है कि लोगों के मन से भ्रम और अविश्वास को दूर करने के लिए आयोग का सामने आकर जवाब देना बेहद जरूरी है।
जनता के भरोसे के बिना लोकतंत्र अधूरा: चिराग पासवान
केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने पटना में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार का हिस्सा होने के नाते उनका मकसद किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना नहीं है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज पर अगर सवाल उठ रहे हैं, तो यह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जिम्मेदारी है कि वे आयोग का पक्ष मजबूती से रखें।
चिराग ने आगे कहा कि विपक्ष का काम तो राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप करना है, लेकिन आम जनता को भरोसे में लेना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि लोगों का चुनावी प्रणाली से भरोसा उठने लगेगा तो यह हमारे लोकतंत्र के लिए कतई ठीक नहीं होगा। इसलिए आयोग को राहुल गांधी या विपक्ष के बयानों का जवाब दिए बिना सीधे देश की जनता के संशय को दूर करना चाहिए।
जनता के भ्रम दूर करे आयोग: उपेंद्र कुशवाहा
आरएलएम के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी चिराग पासवान की बात का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद के कारण आम जनता में काफी भ्रम की स्थिति बन गई है।
कुशवाहा ने मांग की कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग को तत्काल स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए ताकि लोगों का संदेह खत्म हो सके।
पारदर्शिता से बढ़ेगा चुनाव आयोग पर विश्वास: टीडीपी
आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी टीडीपी ने भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से अधिक पारदर्शिता बरतने की अपील की। टीडीपी संसदीय दल के नेता लावु श्री कृष्ण देवरायालु ने कहा कि चुनाव आयोग हमारे लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है।
जब भी किसी संस्था पर सवाल खड़े हों, तो उचित स्पष्टीकरण और पारदर्शिता बनाए रखने से जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश में यह पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित की गई थी और मतदाताओं को अपनी बात रखने का पूरा समय दिया गया था।
क्या है विवाद की वजह?
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आयोग के दो शीर्ष अधिकारियों ने उनकी सहमति या जानकारी के बिना लिए गए कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद से विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रहा है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि सदस्यों के बीच अलग-अलग राय होना सामान्य है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से ही लिए गए थे।
एनडीए सहयोगियों की इस मांग पर बिहार भाजपा के प्रवक्ता मनोज शर्मा ने कहा कि चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा अपनी-अपनी पार्टियों के प्रमुख हैं और उन्हें इस विषय पर बोलने का पूरा अधिकार है।
वहीं, एक अन्य भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इन दोनों दलों के साथ उनका गठबंधन मुख्य रूप से बिहार तक सीमित है, राष्ट्रीय स्तर पर नहीं।