इजरायल की राजनीति में रविवार को एक बड़ा भूचाल आ गया। लंबे समय तक सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेदखल करने के लिए उनके दो सबसे कड़े प्रतिद्वंद्वियों – नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड – ने फिर से हाथ मिला लिया है।
यह गठबंधन सिर्फ राजनीतिक समीकरण नहीं, बल्कि इजरायल के भविष्य को एक नई दिशा देने की भावपूर्ण कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों ने अपनी पार्टियों का विलय कर एक नए दल ‘टुगेदर’ के गठन का ऐलान किया है, जिसका नेतृत्व नफ्ताली बेनेट करेंगे।
आपसी मतभेदों को दरकिनार कर आए साथ
मतभेदों को पीछे छोड़कर देश को सर्वोपरि रखने का संकल्प नफ्ताली बेनेट, जो एक कट्टरपंथी दक्षिणपंथी और रूढि़वादी यहूदी माने जाते हैं, और यायर लैपिड, जो धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी विचारों के समर्थक हैं, वैचारिक रूप से एक-दूसरे के विपरीत ध्रुव रहे हैं। लेकिन आज के चुनौतीपूर्ण दौर में उन्होंने आपसी मतभेदों को दरकिनार कर दिया है।
लैपिड ने अपनी पार्टी ‘येश आतिद’ के विलय की घोषणा करते हुए भावुक स्वर में कहा, ”यह कदम देश को आंतरिक विभाजन से बचाने और इजरायल को आगे ले जाने की एक सामूहिक कोशिश है।”
यह गठबंधन उन लाखों इजरायली नागरिकों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जो देश में राजनीतिक स्थिरता और एकता चाहते हैं।
नेतन्याहू के लिए खतरे की घंटी
बेंजामिन नेतन्याहू की चुनौती और 2026 की चुनावी जंग इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेतन्याहू के लिए यह गठबंधन एक बड़े खतरे की घंटी है। 2023 के हमलों के बाद से नेतन्याहू की ‘सुरक्षा की गारंटी वाली’ छवि पर गंभीर सवाल उठे हैं, और हालिया सर्वे लगातार उनकी हार की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
पहले भी नेतन्याहू के शासन को खत्म कर चुकी है यह जोड़ी
बेनेट और लैपिड की यह जोड़ी पहले भी 2021 में नेतन्याहू के 12 साल पुराने शासन को खत्म कर चुकी है। हालांकि, वह गठबंधन महज 18 महीने ही चल पाया था, लेकिन इस बार बेनेट के नेतृत्व में ‘टुगेदर’ पार्टी का लक्ष्य न केवल चुनाव जीतना है, बल्कि इजरायल के जख्मों पर मरहम लगाकर एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण करना है।
2026 के चुनाव अब मात्र एक राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि इजरायल के राजनीतिक चरित्र को बदलने वाली जंग बन गए हैं।