कर्नाटक में के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया की मंगलवार को कांग्रेस हाईकमान के साथ होने वाली अहम बैठक ने लंबे अर्से से नेतृत्व परिवर्तन की चल रही चर्चाओं की सरगर्मी बढ़ा दी है।
कर्नाटक के प्रभारी कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने भले ही राज्य में होन वाले राज्यसभा की चार सीटों के चुनाव के संदर्भ में यह बैठक बुलाए जाने की बात कही है मगर पार्टी के सियासी हलकों में कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा रहा है।
हाईकमान करेगा फैसला
मुख्यमंत्री सिद्दरमैया तथा उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच राज्य की सत्ता की बागडोर संभालने को लेकर चल रही अंदरूनी प्रतिस्पर्धा और खींचतान छिपी नहीं है और ऐसे में हाईकमान पर भी अब इस प्रसंग का समाधान निकालने का दबाव है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच सिद्दरमैया के बैठक के लिए आने के सवालों का जवाब राहुल गांधी द्वारा दिए जाने की टिप्पणी कर सस्पेंस को और बढ़ा दिया।
नेतृत्व में बदलाव की संभावना
राहुल गांधी और खरगे के साथ सिद्दरमैया की यह बैठक मंगलवार सुबह 11 बजे प्रस्तावित है जिसमें कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल तथा कर्नाटक के प्रभारी महासचिव रणदीप सुरजेवाला के भी मौजूद रहने की संभावना है।
सिद्दरमैया ने भी बैठक का एजेंडा मालूम नहीं होने की टिप्पणी करते हुए कहा कि बेशक मुझे चर्चा के लिए बुलाया गया है। राज्य में क्या जल्द ही नेतृत्व में बदलाव की संभावना है इस पर सिद्दरमैया ने यह कहते हुए जवाब टाल दिया कि ऐसी अटकलें तो हमेशा लगती रहती हैं।
कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
हालांकि, उपमुख्यमंत्री तथा कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को अभी बैठक के लिए कोई बुलावा नहीं गया है मगर उन्होंने सोमवार को कहा कि यदि हाईकमान ने बुलाया तो वे दिल्ली जाएंगे।
गौरतलब है कि नवंबर-दिसंबर में सिद्दरमैया सरकार के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद से ही डीके शिवकुमार तथा उनके समर्थक राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के लिए दबाव बना रहे हैं।
बताया जाता है कि 2023 विधानसभा चुनाव की के बाद सिद्दरमैया को मुख्यमंत्री बनाने पर डीके शिवकुमार ने इस वादे पर हामी भरी थी कि ढाई साल बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
सार्वजनिक बयानबाजी
हालांकि, इसके बाद सिद्दरमैया किसी न किसी बहाने नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे को अब तक टालते रहने में सफल रहे हैं और अभी पिछले दिनों ही तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया। नेतृत्व को लेकर चल रही अंदरूनी रस्साकशी के कारण ही सिद्दरमैया कर्नाटक में अपनी कैबिनेट का विस्तार और पुनर्गठन नहीं कर पाए हैं।
पिछले साल नवंबर के बाद काफी दिनों तक दो नेताओं के समर्थकों की ओर से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर खूब सार्वजनिक बयानबाजी भी हुई और इस खुली गुटबाजी को रोकने के लिए आलाकमान को सख्त निर्देश भी देना पड़ा था।
मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता साफ
वैसे कहा यह भी जा रहा कि सिद्दरमैया हाईकमान से राज्यसभा चुनाव की उम्मीदवारी के साथ मंत्रिमंडल विस्तार के अटके मामले का रास्ता साफ कराने का बैठक में प्रयास करेंगे।
बताया जाता है कि केरलम के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सिद्दरमैया ने राहुल गांधी से मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़े मामले पर चर्चा के लिए बैठक का अनुरोध किया था। इसके मद्देनजर ही केसी वेणुगोपाल ने रविवार को मुख्यमंत्री को फोन कर मंगलवार को हाईकमान संग बैठक के लिए बुलाया।