बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच विश्वास की कमी को उजागर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनावी राज्य में 1,000 से अधिक प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में चुनाव आयोग द्वारा प्रशासनिक बदलाव करने से पहले संबंधित राज्य से सलाह की जरूरत पर कानूनी सवाल को खुला रखा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि अखिल भारतीय सेवाओं के गठन का उद्देश्य विफल हो रहा है।
सीजेआई ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के कार्य में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ी क्योंकि पक्षों के बीच विश्वास की कमी थी।
याचिका के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि पहली बार किसी राज्य के मुख्य सचिव को इस तरह स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनावों की अधिसूचना जारी होने के बाद लगभग 1,100 अधिकारियों का रातोंरात स्थानांतरण किया गया।
यौन उत्पीड़न के आरोपित सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक को अग्रिम जमानत दे दी। आरोपित पर एक महिला कर्मचारी का यौन उत्पीड़न करने और उसे और उसके पति को आपराधिक मामले में फंसाने की कोशिश करने का आरोप है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कोच्चि स्थित साफ्टवेयर कंपनी चलाने वाले कक्कनाड निवासी 50 वर्षीय वेणु गोपालकृष्णन को जांच में पूर्ण सहयोग देने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरोपित राहत पाने का हकदार है। इसलिए, हम इस अपील को स्वीकार करते हैं और अपीलकर्ता के संबंध में हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हैं।
पीठ ने कहा कि गोपालकृष्णन अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग न करें और किसी भी तरह से गवाहों को प्रभावित न करें या रिकार्ड में मौजूद सामग्री के साथ छेड़छाड़ न करें।