शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दलील दी कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला गुट लगातार दल-बदल का लाभ उठा रहा है।
उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग ने मुख्य रूप से विधायी बहुमत के परीक्षण के आधार पर शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को आवंटित किया था।
सुनवाई के दौरान कामत ने कहा कि इस मामले में समय पर सुनवाई न होने के कारण शिंदे गुट को पहले ही दल-बदल के परिणामस्वरूप लाभ मिल चुका है और वे आज भी इसका फायदा उठा रहे हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत एक बार अयोग्य घोषित होने के बाद सदस्य अपनी सदस्यता खो देते हैं।
पीठ के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अयोग्यता, दल-बदल की कार्रवाई का कानूनी नतीजा है और कोर्ट उस तारीख का ऐलान कर सकता है जब से सदस्य अयोग्य हुए, भले ही इसके बाद कोई ठोस राहत प्रभावी रूप से न दी जा सके।
उन्होंने यह भी हवाला दिया कि असाधारण परिस्थितियों में, जहां अध्यक्ष फैसला करने में विफल रहते हैं, सुप्रीम कोर्ट स्वयं दल-बदल का निर्धारण कर सकता है। उद्धव ठाकरे गुट ने अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं, और अब शिंदे गुट इस मामले में दो सितंबर को अपनी अंतिम दलीलें पेश करेगा।