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वैदिक पंचांग के अनुसार, बुधवार 11 मार्च को शीतला अष्टमी (Sheetala Ashtami 2026) है।
यह पर्व हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर ममतामयी मां शीतला की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत रखा जाता है।
धार्मिक मत है कि जगत की देवी मां शीतला की पूजा करने से शारीरिक एवं मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
ज्योतिषियों की मानें तो शीतला अष्टमी पर कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं।
इन योग में जगत की देवी मां शीतला की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। आइए, शीतला अष्टमी के बारे में सबकुछ जानते हैं-
शीतला अष्टमी शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को देर रात 01 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी और 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी।
इस प्रकार यानी उदया तिथि गणना से 11 मार्च को शीतला अष्टमी मनाई जाएगी। शीतला अष्टमी पर पूजा के लिए शुभ समय 11 मार्च को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 27 मिनट तक है। इस दौरान साधक देवी मां शीतला की पूजा कर सकते हैं।
शीतला अष्टमी शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इस दिन सिद्धि योग का संयोग सुबह 09 बजकर 13 मिनट से है।
इसके साथ ही शिववास योग का भी संयोग है। शिववास योग का संयोग 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट तक है। इस दौरान मां शीतला की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी। साथ ही आरोग्य जीवन का वरदान मिलेगा।
पंचांग
- सूर्योदय – सुबह 07 बजकर 15 मिनट पर
- सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 42 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 27 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 13 मिनट से 02 बजकर 55 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 39 मिनट से 06 बजकर 07 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक