प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर शीतला अष्टमी मनाई जाती है, जिसे बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है।
यह पर्व होली से 8 दिन बाद मनाया जाता है। इस खास अवसर पर मां शीतला देवी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस दिन महिलाएं संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है।
ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कब मनाई जाएगी शीतला अष्टमी।
शीतला अष्टमी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को रात 01 बजकर 54 मिनट पर होगी।
वहीं, इसका समापन 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर होगा। ऐसे में शीतला अष्टमी 11 मार्च को मनाई जाएगी।
शीतला अष्टमी के दिन पूजा मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 27 मिनट तक।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय का समय- सुबह 06 बजकर 36 मिनट
सूर्यास्त का समय- शाम 06 बजकर 27 मिनट
चंद्रोदय का समय- 01 बजकर 54 मिनट (मार्च 12)
चंद्रास्त का समय- सुबह 11 बजकर 07 मिनट
ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04 बजकर 48 मिनट से 05 बजकर 57 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 25 मिनट से 06 बजकर 49 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक
अमृत काल- दोपहर 12 बजकर 08 मिनट से 01 बजकर 55 मिनट तक
शीतला अष्टमी पूजा विधि
- इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
- इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- चौकी पर मां शीतला देवी की प्रतिमा को विरजामन करें और उन्हें रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
- दीपक जलाकर आरती करें।
- व्रत कथा का पाठ करें।
- बासी भोग अर्पित करें।
- जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।
इन बातों का रखें ध्यान
- इस दिन मंदिर या गरीब लोगों में दान करें
- किसी से वाद-विवाद न करें।
- किसी के बारे में गलत न सोचें।
- तामसिक भोजन का सेवन न करें।