प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
हिंदू धर्म में उपवास और व्रत का विशेष महत्व है। हर महीने आने वाला प्रदोष व्रत भी इन्हीं में से एक है, जिसे भगवान शिव और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
यह व्रत त्रयोदशी तिथि को आता है और महीने में दो बार पड़ता है। एक बार कृष्ण पक्ष में और दूसरी बार शुक्ल पक्ष में। जब त्रयोदशी शनिवार को आती है, तो यह व्रत शनि प्रदोष कहलाता है।
मान्यता है कि इस व्रत से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और साथ ही शनिदेव का अशुभ प्रभाव भी शांत होता है।आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस वर्ष 4 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है। इस दिन प्रदोष व्रत रखना बेहद शुभ माना गया है।
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 5 अक्टूबर 2025, दोपहर 03:03 बजे
प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 06:24 बजे से 08:49 बजे तक
अवधि: 2 घंटे 25 मिनट
पूजा विधि
व्रत वाले दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ कर भगवान शिव और माता पार्वती सहित पूरे शिव परिवार की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
घी का दीपक जलाकर पूजा शुरू करें। फूल, धूप, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और भगवान शिव की आरती उतारें।
संध्या समय प्रदोष मुहूर्त में पुनः स्नान कर शिव मंदिर जाएं।
शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, आक का फूल, धतूरा, भांग, शहद और गन्ना चढ़ाएं।
शनि प्रदोष व्रत की कथा सुनें और अंत में क्षमा याचना करें।
पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनिदेव की आराधना करें।
शनि प्रदोष के विशेष उपाय
जलाभिषेक: तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें काला तिल और शमी पत्र मिलाएं और शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें। यह उपाय शनि दोष कम करने में मदद करता है।
बेलपत्र अर्पण: इस दिन शिवलिंग पर 108 बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही उड़द की दाल, काले वस्त्र, जूते-चप्पल और शनिदेव से जुड़ी वस्तुएं दान करना लाभकारी होता है।
शनिदेव की आराधना: शनि प्रदोष के दिन शनिदेव की पूजा करनी चाहिए।
हनुमान जी की पूजा :शनि प्रदोष के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना गया है। हनुमान जी की आराधना से शनि दोष और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
शनि प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और आर्थिक उन्नति मिलती है।
विशेष रूप से शनिदोष, साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित जातकों को यह व्रत अवश्य करना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन की गई पूजा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
कथाएं और मान्यताएं
पुराणों के अनुसार, प्रदोष काल में की गई पूजा से शिवजी तुरंत प्रसन्न होते हैं। एक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब विष निकला, तो भगवान शिव ने प्रदोष काल में ही उसे ग्रहण कर संसार की रक्षा की।
तभी से इस समय उनकी विशेष पूजा का महत्व बढ़ गया। इसी तरह, शनि प्रदोष व्रत की मान्यता है कि इसे करने वाले भक्तों को शनि ग्रह के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
व्रत के नियम
व्रत वाले दिन सात्विक भोजन करें और अनावश्यक क्रोध या नकारात्मक विचारों से बचें।
शाम को प्रदोष मुहूर्त में शिव मंदिर जाकर विशेष पूजा करें।
व्रत कथा सुनना और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना अनिवार्य है।
दान और सेवा के कार्य अवश्य करें।
शनि दोष से मिलती है मुक्ति-
इस दिन व्रत रखने और पूजन करने से शनि दोष का निवारण होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में संतुलन और स्थिरता आती है।
अगर आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे हैं या आपके जीवन में बाधाएं लगातार आ रही हैं, तो इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से आपको निश्चित ही लाभ होगा।