नेशनल हाइवे पर कैंप-1, महात्मा गांधी मार्केट से लेकर मजार (साक्षरता चौक) तक मुख्य सड़क की ऊंचाई सर्विस रोड की तुलना में लगभग एक फीट अधिक है। इस ऊँचाई के कारण सड़क किनारे वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, इस फोरलेन सड़क का निर्माण साल 2017-18 के आसपास हुआ था। लेकिन आठ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, सड़क के दोनों किनारों पर लोहे की सुरक्षा बैरिकेड्स नहीं लगाई गई हैं। यही कारण है कि हाल ही में एक ट्रक दुर्घटना के करीब पहुंच गया, लेकिन भाग्यवश पलटने से बच गया।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाइवे के किनारों पर बैरिकेडिंग न होने से भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है। यह स्थिति न केवल वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा करती है, बल्कि राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए भी जोखिमपूर्ण है।
स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि जल्द से जल्द हाइवे के दोनों ओर सुरक्षा बैरिकेड्स लगाए जाएँ, ताकि अनहोनी की घटनाओं को रोका जा सके और सड़क यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।