2025 में दुर्घटनाओं की श्रृंखला, अब DGCA पर FAA की जांच की तैयारी…

नवंबर में भारत के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की जांच US फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) करेगा। 2025 भारत के लिए एविएशन के नजरिए से पिछले कुछ दशकों में सबसे खराब साल रहा। अब इसकी सेफ्टी निगरानी की असरदारता की जांच की जाएगी।

इस साल एअर इंडिया का अहमदाबाद में दुखद क्रैश हुआ, उत्तराखंड में कई हेलिकॉप्टर हादसे हुए, दिल्ली का एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम फेल हुआ और दिसंबर में इंडिगो का शेड्यूल भी गड़बड़ा गया।

किन चीजों का होगा मूल्यांकन?

अगर FAA के आने वाले री-इवैल्यूएशन (दोबारा मूल्यांकन) में नतीजा खराब रहता है तो एयर इंडिया और इंडिगो के लिए यूएस के लिए नई उड़ानें शुरू करना या मौजूदा उड़ानों में बढ़ोतरी करना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही अमेरिकी अधिकारी उनके विमानों और क्रू पर ज्यादा कड़ी नजर रखेंगे। दूसरे देश भी अपने यहां भारतीय एयरलाइंस के साथ ऐसा ही रवैया अपना सकते हैं।

अधिकारियों ने क्या कहा?

हालांकि, सरकार के सीनियर अधिकारियों ने नवंबर में होने वाली FAA जांच की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि भारतीय डीजीसीए इसमें अच्छा प्रदर्शन करेगा और रेटिंग घटने (डाउनग्रेड) की कोई संभावना नहीं है।

उन्होंने कहा, “यह जांच हर पांच साल में होती है। इस मूल्यांकन के तय चेकलिस्ट पैमानों पर हम अच्छा स्कोर करेंगे।”

यूएस का एविएशन रेगुलेटर कैटेगरी I और II वाले देशों की एक लिस्ट रखता है। इनमें से टॉप कैटेगरी वाले कुछ देशों का FAA दोबारा कभी मूल्यांकन नहीं करता, क्योंकि उन्होंने मजबूत सेफ्टी ओवरसाइट सिस्टम बनाया है और एयरवर्दीनेस, मेंटेनेंस और फ्लाइट ऑपरेशन के मूल्यांकन से जुड़ा डेटा आपस में शेयर करते हैं जबकि ऐसा काम भारत ने अभी तक नहीं किया है।

भारत क्यों है जांच के दायरे में?

FAA की कैटेगरी I में होने के बावजूद डीजीसीए का समय-समय पर फिर से मूल्यांकन किया जाता रहता है, क्योंकि यहां सिविल एविएशन के तेजी से बढ़ते हुए दायरे के हिसाब से इसके टेक्निकल स्टाफ की संख्या नहीं बढ़ पाई है। साथ ही सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAA) बनाने की योजना भी लगभग दो दशकों से कागजों तक ही सीमित है।

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