इंसान सदियों से लंबी उम्र और अमरता का सपना देखता आया है। विज्ञान भी लगातार इस रहस्य को समझने में जुटा है कि आखिर शरीर बूढ़ा क्यों होता है और क्या इस प्रक्रिया को रोका जा सकता है।
अब इजरायल के विज्ञानियों ने ऐसा शोध किया है, जिसने इस दिशा में नई उम्मीद जगा दी है। इजरायल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार बार-इलान यूनिवर्सिटी, तेल अवीव यूनिवर्सिटी और अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट आन एजिंग के शोधकर्ताओं ने बूढ़े चूहों के लिवर में उम्र बढ़ने के कई प्रमुख लक्षणों को बेअसर करने में सफलता हासिल की है।
पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस शोध ने संकेत दिया है कि बढ़ती उम्र शायद उतनी एकतरफा प्रक्रिया नहीं है, जितनी अब तक मानी जाती रही है।शोध का नेतृत्व प्रोफेसर हैम कोहेन की टीम के शोधार्थी रान नागर और जकारिया श्वार्ट्ज ने किया।
प्रोटीन का क्या है काम?
विज्ञानियों ने एसआइआरटी6 नामक एक विशेष प्रोटीन पर काम किया, जिसे लांगेविटी प्रोटीन कहा जाता है। यह प्रोटीन शरीर में डीएनए की मरम्मत करने, मेटाबालिज्म को नियंत्रित रखने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आधुनिक तकनीकों की मदद से विज्ञानियों ने डीएनए की संरचना और जीनों की गतिविधियों का अध्ययन किया और पाया कि प्रोटीन बढ़ाने पर बूढ़ी कोशिकाओं में फिर से युवावस्था जैसे बदलाव दिखाई देने लगे।डीएनए के भीतर छिपा मिला लंबी उम्र का सूत्रप्रयोग के लिए विज्ञानियों ने सामान्य चूहों को प्राकृतिक रूप से बूढ़ा होने दिया।
जब उनकी उम्र लगभग 24 महीने हो गई, जो इंसानों में करीब 70 से 80 वर्ष के बराबर मानी जाती है, तब उनके लिवर में प्रोटीन का स्तर बढ़ाया गया। तुलना के लिए एक अन्य समूह में ऐसा जीन सक्रिय किया गया जिसका उम्र बढ़ने से कोई संबंध नहीं था। शोध में पता चला कि उम्र बढ़ने के साथ डीएनए को व्यवस्थित रखने वाली संरचना, जिसे क्रोमैटिन कहा जाता है, ढीली और अव्यवस्थित होने लगती है।
बढ़ता है बीमारियों का खतरा
इससे सूजन पैदा करने वाले जीन सक्रिय हो जाते हैं और कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विज्ञानियों ने एच3के9एसी नामक एक रासायनिक संकेतक की पहचान की, जो यह तय करता है कि डीएनए का कौन-सा हिस्सा खुला रहेगा और कौन-सा बंद। बूढ़े चूहों में यह संकेतक खुली अवस्था में अटक गया था, जिससे हानिकारक सूजन पैदा करने वाले जीन लगातार सक्रिय हो रहे थे।
एसआइआरटी6 ने इन स्विचों को फिर से बंद कर दिया और डीएनए की संरचना को दोबारा कसकर व्यवस्थित कर दिया। परिणामस्वरूप लिवर की कोशिकाओं में उम्र बढ़ने के कई संकेत उलट गए।जीवन को अधिक लंबा बनाने का लक्ष्ययह पहला अवसर नहीं है जब एसआइआरटी6 ने विज्ञानियों को चौंकाया हो।
वर्ष 2012 में प्रोफेसर कोहेन दुनिया के पहले वैज्ञानिक बने थे जिन्होंने चूहों में इसका स्तर बढ़ाकर उनकी जीवन अवधि बढ़ाने में सफलता हासिल की थी। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए उन्होंने एसआइआरटी लैब नामक जैव-प्रौद्योगिकी कंपनी भी स्थापित की है, जो उम्र बढ़ने के साथ घटने वाले एसआइआरटी6 के स्तर को बढ़ाने के उपाय खोज रही है।
इंसानों को कब मिलेगा फायदा?
प्रोफेसर कोहेन कहते हैं कि कुछ व्हेल जैसे स्तनधारी जीव इंसानों से कहीं अधिक समय तक जीवित रहते हैं। उनका लक्ष्य उन प्राकृतिक रहस्यों को समझकर मनुष्यों के जीवन को अधिक लंबा और स्वस्थ बनाना है।
फिलहाल इंसानों को इस तकनीक का फायदा मिलने में समय लगेगा, लेकिन इतना तय है कि बुढ़ापे को अपरिवर्तनीय मानने वाली सोच को इस शोध ने बड़ी चुनौती दे दी है। शायद आने वाले वर्षों में विज्ञान उम्र की घड़ी को पीछे घुमाने के और भी करीब पहुंच जाए।