रूस की राजधानी मॉस्को में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के लिए दो साल पहले निकले गुजरात के 22 वर्षीय साहिल मोहम्मद हुसैन अब यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में फंस चुके हैं।
साहिल के परिवार ने केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें सुरक्षित वापस लाया जाए। परिवार का कहना है कि साहिल को नशीली दवाओं के झूठे मामले में फंसाकर रूसी सेना में भर्ती करा दिया गया, लेकिन अब वह यूक्रेनी सेना के पास आत्मसमर्पण कर चुका है।
साहिल का परिवार गुजरात के सिरेमिक हब कहे जाने वाले मोरबी के कालिका प्लॉट इलाके में स्थित हसीना मजोठी के दो मंजिला घर में रहता है।
इस घर में हसीना अपनी मां, बहन, भाई और भाभी के साथ रहती हैं। दो साल पहले, उनके इकलौते बेटे, 22 वर्षीय साहिल मोहम्मद हुसैन ने रूस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए घर छोड़ा था। लेकिन अब एक चौंकाने वाली खबर ने परिवार को हिलाकर रख दिया है।
बुधवार सुबह गुजरात की आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने हसीना और उनके भाई फारूक को अहमदाबाद में पूछताछ के लिए ले गई।
यह कार्रवाई यूक्रेनी अधिकारियों द्वारा जारी एक वीडियो क्लिप के बाद हुई, जिसमें साहिल कथित तौर पर कह रहा है कि उसने ड्रग्स के मामले में सात साल की जेल की सजा से बचने के लिए रूस के “विशेष सैन्य अभियान” (रूस-यूक्रेन युद्ध) में शामिल होने का फैसला किया था।
परिवार की गुहार: साहिल को वापस लाएं
हसीना ने बुधवार को गांधीनगर से द इंडियन एक्सप्रेस को फोन पर बताया, “हम मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश कर रहे हैं और उनकी मदद मांग रहे हैं।”
स्थानीय समुदाय के नेता कासमभाई सुमारा के अनुसार, साहिल ने आखिरी बार अपने परिवार से दो महीने पहले बात की थी।
साहिल के रिश्तेदार अनवर मजोठी ने बताया कि हसीना एक दर्जी हैं, जिन्होंने लगभग 23 साल पहले जामनगर के मोहम्मद हुसैन से शादी की थी। लेकिन जब साहिल दो साल का था, तब दोनों के बीच तलाक हो गया।
साहिल का रूस जाना और युद्ध में फंसना
अनवर ने बताया कि साहिल ने गुजराती माध्यम के स्कूल से 12वीं कक्षा (विज्ञान संकाय) पास करने के बाद मोरबी में एक फ्लोर टाइल्स फैक्ट्री में काम शुरू किया था।
उसकी रुचि कंप्यूटर साइंस में थी, और उसने सेंट पीटर्सबर्ग की एक यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। पिछले दो साल से वह रूस में रह रहा था।
अनवर के अनुसार, साहिल रूस में एक ई-कॉमर्स कंपनी के लिए डिलीवरी पर्सन के रूप में भी काम कर रहा था। एक बार डिलीवरी के दौरान उसके पास ड्रग्स वाला पार्सल पकड़ा गया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
परिवार ने बताया, “उसे सात साल की सजा सुनाई गई थी। उसने रूसी सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसमें उसकी सजा माफ करने के बदले उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में लड़ने के लिए कहा गया। 16 दिन की ट्रेनिंग के बाद, उसे कुछ दिन पहले युद्ध के मैदान में भेज दिया गया। बाद में उसने यूक्रेनी सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।”
उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि साहिल को वापस लाया जाए और उसकी मां के साथ पुनर्मिलन कराया जाए।
मां का सपना और समाज को जवाब
साहिल के मामा मोहम्मदभाई मजोठी ने बताया, “हसीना ने अपने बेटे को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसरों के लिए विदेश भेजा था।
वह चाहती थीं कि उनका बेटा तरक्की करे और समाज में अपनी पहचान बनाए। वह अपने ससुराल वालों, जो ज्यादातर शिक्षित और सरकारी नौकरियों में हैं, उनको यह साबित करना चाहती थीं कि उनका बेटा भी कुछ कर सकता है।”
एटीएस की जांच
गुजरात एटीएस अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में बताया कि साहिल “तेज-तर्रार और समझदार युवक” था।
एक अधिकारी ने बताया, “सिर्फ 20 साल की उम्र में उसने खुद ही रूस के आईटीएमओ विश्वविद्यालय में कंप्यूटर इंजीनियरिंग कोर्स में प्रवेश लिया और वीजा प्राप्त कर अकेले विदेश चला गया। युद्ध के कारण उस समय रूस में छात्र वीजा अपेक्षाकृत आसानी से मिल रहा था।”
एटीएस सूत्रों के अनुसार, साहिल ने 2023 में आईटीएमओ यूनिवर्सिटी, सेंट पीटर्सबर्ग के फैकल्टी ऑफ सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटर सिस्टम्स में दाखिला लिया था। उसने ऑनलाइन फीस भरी और अहमदाबाद से अजरबैजान होते हुए रूस पहुंचा।
एटीएस अब यह जांच कर रही है कि क्या साहिल मानव तस्करी या मादक पदार्थ गिरोहों के संपर्क में था, हालांकि अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
सूत्रों के मुताबिक, साहिल की गिरफ्तारी के बाद भारतीय दूतावास ने उसे कानूनी सहायता के लिए स्थानीय वकीलों के संपर्क नंबर उपलब्ध कराए थे। लेकिन मुकदमे की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही उसने रूसी सेना में शामिल होने का निर्णय ले लिया।
साहिल के रिश्तेदारों ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वे यूक्रेनी अधिकारियों से बातचीत कर साहिल की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें। हसीना मजोठी का कहना है, “हम सिर्फ यही चाहते हैं कि मेरा बेटा सुरक्षित भारत लौट आए।”