यूक्रेन के जपोरीजिया क्षेत्र के गांव में स्थित एक स्कूल पर रूस की बमबारी में 24 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए हैं। मरने वालों में बचाव दल के भी दो सदस्य शामिल हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि स्कूल का इस्तेमाल राहत सामग्री के वितरण केंद्र के रूप में हो रहा था। साथ ही वहां पर लोग शरण भी लिए हुए थे। जेलेंस्की ने कहा कि स्कूल भवन पर एक बार हवाई हमला होने के कुछ देर बाद फिर हमला हुआ। जपोरीजिया सिटी काउंसिल की सचिव रेजीना खारचेंको ने हमले के बाद 27 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। इसलिए मृतक संख्या बढ़ सकती है।
एक अन्य घटनाक्रम में सोमवार को रूस और यूक्रेन के मोबाइल एप हैक होने की जानकारी प्रकाश में आई है। यूक्रेन ने रूस पर उसके इमर्जेंसी अलर्ट एप को हैक करने का आरोप लगाया है। कहा, इस हैकिंग के चलते यूक्रेनी लोगों के मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रानिक गैजेट पर परमाणु हमले और रासायनिक हमलों के अलर्ट आ रहे हैं। इससे लोग भयभीत हैं और उन हमलों से बचने के लिए घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं।
इस बीच रूस ने कहा है कि उनके देश में भी मोबाइल एप साइबर अटैक के शिकार हुए हैं। यूक्रेन में ये अलर्ट ओलेस्की और नजदीकी इलाकों में छह दिनों का युद्धविराम खत्म होने के बाद आ रहे थे। यूक्रेन के लोगों को मिला एक अलर्ट यह था कि रूस ने हाइपरसोनिक मिसाइल ओेरेश्निक में परमाणु बम फिट करके उसे दाग दिया है। इससे पूरे यूक्रेन में अफरातफरी का माहौल बन गया और जो जहां था वहीं वह सुरक्षित स्थान ढूंढ़ने लगा। लेकिन कुछ ही देर बाद यूक्रेन की वायुसेना को पता चला कि देश का अलर्ट सिस्टम हैक हो गया है, इसलिए उससे जुड़ा टेलीग्राम मैसेजिंग चैट फर्जी अलर्ट भेज रहा है।
वायुसेना को सिस्टम हैक होने का पता तब चला जब उसने देखा कि अलर्ट करने वाले मैसेज रूसी भाषा में प्रसारित हो रहे हैं। कुछ घंटे बाद रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास ने रूस के आपात मामलों के मंत्रालय के हवाले से बताया कि रूसी मोबाइल एप पर साइबर अटैक हुआ है। इसके कारण लोगों तक गलत सूचनाएं पहुंच रही हैं। इस साइबर अटैक की जिम्मेदारी यूक्रेन समर्थक हैकिंग ग्रुप आतेश ने ली है। रूसी सरकार ने लोगों को शांत रहने और अपना कामकाज करते रहने की सलाह दी है।