रूस-चीन एक सुर में: पुतिन और शी जिनपिंग ने ट्रंप की परमाणु रणनीति की आलोचना की…

चीन और रूस ने एकजुट होकर अमेरिका की नीतियों की निंदा की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के हाल के बीजिंग दौरे को द्विपक्षीय संबंधों में विकास के लिहाज से ऐतिहासिक बताने और उसे लेकर अन्य बड़े दावे चंद रोज में ही खारिज हो गए हैं।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ ट्रंप के गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस शील्ड प्लान और अमेरिका की गैरजिम्मेदाराना परमाणु नीति की निंदा की है। साथ ही पश्चिम एशिया में लड़ाई और तनाव अविलंब खत्म किए जाने के लिए कहा है।

पुतिन और चिनफिंग ने की ट्रंप की निंदा

पुतिन और चिनफिंग ने संयुक्त बयान में कहा है कि भूमि से अंतरिक्ष में जाकर मिसाइल हमले को रोकने वाला अमेरिकी डिफेंस सिस्टम विकसित होने से वैश्विक रणनीतिक स्थिरता को खतरा पैदा होगा।

दोनों नेताओं ने अमेरिका और रूस के परमाणु हथियारों को सीमित करने वाले समझौते के नवीनीकरण को लेकर ट्रंप की अनिच्छा की भी निंदा की है।

विदित हो कि इस समझौते को भविष्य में भी जारी रखने की पुतिन ने अमेरिका से कई बार अपील की लेकिन अमेरिका ने उसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

विदित हो कि विश्व में सर्वाधिक करीब छह हजार परमाणु हथियार रूस के पास हैं और अमेरिका के पास इससे कुछ कम हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस और चीन का द्विपक्षीय व्यापार बहुत तेजी से बढ़ा है। वार्षिक व्यापार का यह आकार 228 अरब डॉलर को पार कर गया है।

पुतिन के ताजा दौरे में भी दोनों देशों ने व्यापार को और बढ़ाने पर सहमति जताई है। लेकिन 2,600 किलोमीटर लंबी पावर ऑफ साइबेरिया 2 गैस पाइपलाइन को लेकर कोई समझौता नहीं हो सका जबकि इसके लिए पिछले कई वर्षों से दोनों देशों के बीच वार्ता चल रही है।

शी और पुतिन बीते 13 वर्षों में 41 बार मिल चुके हैं। दोनों नेताओं ने 2022 में रणनीतिक सहयोग समझौता किया है, इसमें दोनों देशों के सहयोग को सीमाओं से परे बताया गया है।

शायद इसीलिए पुतिन के बीजिंग पहुंचने पर पिछले हफ्ते चिनफिंग और ट्रंप के बीच हुए वादे और जी 7 की जगह जी 2 के आकार लेने की परिकल्पना हवा हो गई।

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