2022 में न्यूयॉर्क के नजदीक साहित्यिक कार्यक्रम के मंच पर हुआ हमला खून के तालाब में पड़े होने के अनुभव वाला था। उस दौरान मैं जमीन पर पड़ा बचने के लिए छटपटा रहा था और वह (हमलावर) मुझ पर हावी था और धारदार हथियार से लगातार हमले कर रहा था।
यह बात भारतीय मूल के लेखक सलमान रुश्दी ने अमेरिका में बफेलो की फेडरल कोर्ट में सुनवाई के दौरान कही है। इस कोर्ट में 2022 में रुश्दी पर हुए हमले के मामले की सुनवाई चल रही है।
इससे पहले न्यूयॉर्क स्टेट कोर्ट रुश्दी की हत्या के प्रयास मामले में लेबनानी मूल के 28 वर्षीय अमेरिकी नागरिक हादी मतार को दोषी ठहराकर उसे 25 वर्ष के कारावास की सजा सुना चुका है।
रुश्दी ने कहा, अचानक हुए हमले से वह मंच पर गिर पड़े थे। कुछ ही देर में उन्हें अपने आसपास खून का तालाब नजर आया…फिर सब कुछ धुंधला पड़ता चला गया। रुश्दी को इस हमले में अपनी दाहिनी आंख गंवानी पड़ी और महीनों अस्पताल में रहने के बाद उनकी जान बची थी।
हमलावर हादी ने रुश्दी के 1988 में प्रकाशित उपन्यास सैटेनिक वर्सेज के खिलाफ ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्ला खोमैनी द्वारा 1989 में जारी फतवे के प्रभाव में आकर भारतीय मूल के अमेरिका निवासी लेखक पर हमला किया था।
हादी न्यूयॉर्क से नजदीक चाउताउक्वा में आयोजित उस कार्यक्रम में शामिल हुआ था जहां पर रुश्दी को आमंत्रित किया गया था। उसी दौरान उसने मौका देखकर मंच पर बैठे रुश्दी पर धारदार हथियार से हमला किया था।
मौके से गिरफ्तार हादी को स्टेट कोर्ट ने 2025 में 25 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। फेडरल कोर्ट में उस पर आतंकवाद से जुड़े होने के आरोप साबित होते हैं तो उसकी सजा उम्रकैद में बदल सकती है। 79 वर्षीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित रुश्दी ब्रिटिश नागरिक हैं।
खोमैनी के फतवे में उपन्यास में ईशनिंदा किए जाने की बात कही गई और उसके लिए रुश्दी के लिए मौत का फरमान जारी किया गया था।
इसके बाद रुश्दी ब्रिटिश पुलिस की सुरक्षा में कई वर्षों तक अज्ञातवास में रहे, अंतत: वह अमेरिका आ गए और वहीं पर सुरक्षा के साए में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। हमले के बाद स्वस्थ होने पर उन्होंने घायल अवस्था, इलाज के समय और उसके बाद के अनुभवों पर पुस्तक भी लिखी है।