मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: ईरान से टकराव के बीच अमेरिका में घिरे ट्रंप, इन देशों से मांगी मदद…

 ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के दो सप्ताह बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घरेलू राजनीति में दबाव झेल रहे हैं।

युद्ध की बढ़ती कीमत, अमेरिकी सैनिकों की मौत, तेल की कीमतों में उछाल और शेयर बाजार में गिरावट ने उनकी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रंप अब तक जनता को यह भरोसेमंद ढंग से नहीं समझा पाए हैं कि युद्ध क्यों शुरू किया गया और इसका अंत कैसे होगा।

व्हाइट हाउस के भीतर भी युद्ध को लेकर बेचैनी बढ़ी है। हाल के दिनों में ट्रंप मीडिया कवरेज पर लगातार नाराजगी जताते रहे हैं।

शनिवार को उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मीडिया चाहता है कि अमेरिका युद्ध हार जाए। इसके बाद अमेरिकी प्रसारण नियामक ने कुछ मीडिया संस्थानों को चेतावनी भी दी।युद्ध के बीच ट्रंप फ्लोरिडा स्थित अपने गोल्फ क्लब में कई घंटे बिता रहे हैं और सुपर पीएसी मागा इंक के लिए दान जुटाने में मशगूल हैं।

पिछले हफ्ते भी वह उस दिन गोल्फ खेल रहे थे, जब ईरान युद्ध में मारे गए छह अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव शरीरों को सम्मानपूर्वक लाया गया था। इससे युद्ध को लेकर ट्रंप की गंभीरता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

होर्मुज जलमार्ग पर अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत

ट्रंप ने पहली बार संकेत दिया है कि होर्मुज जलमार्ग में तेल टैंकरों की आवाजाही सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से भी जहाज भेजने की उम्मीद जताई।

रूस को मिला आर्थिक फायदा, विपक्ष को मिला मुद्दा

अमेरिकी वित्त विभाग ने इस सप्ताह रूसी तेल खेपों पर लगे कुछ प्रतिबंधों में 30 दिन की ढील दी, ताकि समुद्र में फंसे रूसी तेल कार्गो बाजार तक पहुंच सकें और ईरान युद्ध से पैदा हुई आपूर्ति कमी कम हो सके। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में उत्पादन बाधित होने से बढ़ती तेल कीमतों का सीधा फायदा रूस को मिल रहा है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी ट्रंप के इस फैसले की आलोचना की है। मध्यावधि चुनाव पर असर की आशंकानवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले युद्ध ने अमेरिकी राजनीति का ध्रुवीकरण कर दिया है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ एकजुट होकर महंगाई और आर्थिक दबाव को चुनावी मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है।

नेशनल डेमोक्रेटिक ट्रेनिंग कमेटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी केली डिट्रिच ने कहा कि पिछले दो सप्ताह ने दिखाया है कि ट्रंप प्रशासन के पास दीर्घकालिक योजना नहीं है।उधर, रिपब्लिकन सांसद रैंड पाल ने भी चेताया है कि यदि पेट्रोल और तेल की कीमतें ऊंची रहीं तो रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है।

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