वेनेजुएला में आए जबरदस्त भूकंप के बाद रविवार तक 33 लोगों को बचाया गया है, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं।
वहीं, हजारों लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। भूकंप के चार दिन बाद और लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है।
बुधवार को आए भूकंप से मरने वालों की संख्या 1400 से ज्यादा हो गई। राहत और बचाव कार्य के लिए 1600 से ज्यादा विदेशी बचाव कर्मी वेनेजुएला पहुंच चुके हैं।
विदेशी बचाव कर्मियों के पहुंचने से पहले स्थानीय लोग और स्वयंसेवक मलबे से जिंदा बचे लोगों और शवों को निकालने में लगे रहे। उन्होंने अक्सर भारी मशीनें न होने और सरकारी मदद की कमी की शिकायत की।
भूकंप के बाद आए झटकों ने नुकसान को और बढ़ा दिया और लोगों को डराए रखा। वेनेजुएला सरकार ने शुरू में ला गुएरा तक मदद पहुंचाने वाले आम नागरिकों का शुक्रिया अदा किया था, लेकिन बाद में सड़क पर आवाजाही को बहुत सख्त कर दिया।
सरकार का कहना था कि ट्रैफिक की वजह से इमरजेंसी गाड़ियों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। सिर्फ अधिकृत लोग ही इस सड़क का इस्तेमाल कर सकते हैं।
वैसे तो सरकार ने सैकड़ों लोगों के लापता या फंसे होने की बात कही है, लेकिन रविवार को विपक्ष द्वारा प्रमोट की गई एक वेबसाइट पर 50 हजार से कुछ कम लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई। यह आंकड़ा शनिवार के मुकाबले थोड़ा कम है, जब 55 हजार लोगों के लापता होने की बात कही गई थी।
वेनेजुएला पहुंची भारत की मानवीय मदद : जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को बताया कि ‘आपरेशन अमिस्ताद’ के तहत भेजी गई राहत सामग्री, दवाइयां, मेडिकल उपकरण और एक फील्ड हास्पिटल यूनिट भूकंप प्रभावित वेनेजुएला पहुंच गई है। यह मानवीय मदद वहां चल रहे राहत कार्यों को और गति देगी। एक्स पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री ने भेजी गई सामग्री की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं।
भारतीय वायुसेना ने एक्स पर लिखा-हमारे दो सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों ने दिल्ली से काराकस तक 14 हजार किलोमीटर से ज्यादा की हवाई दूरी तय करते हुए 23 घंटे की मुश्किल उड़ान पूरी की। हमारे विमान काराकस के माइक्वेटिया इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे।
इनमें 66 टन राहत सामग्री थी। इससे जरूरत पड़ने पर अलग-अलग महाद्वीपों तक मानवीय सहायता पहुंचाने की भारत की क्षमता का पता चलता है। महासागर के पार पहुंचाई गई यह सहायता एक भरोसेमंद साझेदार के तौर पर भारत की बढ़ती भूमिका को फिर से साबित करती है।