होर्मुज जलडमरूमध्य के पास निशाना बनाए गए अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकाप्टर के दो क्रू सदस्यों को जिस ड्रोन बोट का इस्तेमाल कर बचाया गया उसका निर्माण टेक्सास की एक कंपनी ने किया था, जिसके संस्थापकों में भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर वैभव आल्टेकर भी शामिल हैं।
सरोनिक टेक्नोलाजी की ओर से विकसित ड्रोन बोट कोर्सेयर के जरिए किया गया बचाव अभियान, अमेरिकी सशस्त्र बलों द्वारा चलाया गया अपनी तरह का पहला मिशन था। अमेरिकी सेना काफी समय से मानवरहित विमानों का इस्तेमाल करती आ रही है।
कैप्टन टिन हाकिंस ने क्या कहा?
कैप्टन टिम हाकिंस ने कहा कि स्वचालित समुद्री बोट से संचालित यह अमेरिका का पहला बचाव अभियान है, जिसे एक शख्स दूर से निर्देशित कर रहा था। 24 फुट लंबी कोर्सेयर डीजल पर चलती है और 35 नाट तक की अधिकतम रफ्तार अख्तियार कर सकती है।
यह ड्रोन बोट 1,000 पाउंड तक का भार उठाने में सक्षम है और एक बार में 1,000 नाटिकल मील की दूरी तय कर सकती है। सरोनिक टेक्नोलाजी की लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, कंपनी का अमेरिकी नौसेना के साथ आटोनामस सरफेस वेसल्स (बिना चालक के चलने वाले समुद्री जहाजों) के लिए 392 मिलियन अमेरिकी डालर का प्रोडक्शन कांट्रैक्ट है।
नेवी सील से 11 साल तक जुड़े रहे डीनो
नेवी सील से 11 साल तक जुड़े रहे डीनो मवरुकास ने वैभव आल्टेकर, डग लैंबर्ट और राब लीहमन के साथ मिलकर सितंबर 2022 में सरोनिक टेक्नोलाजी की स्थापना की थी। कंपनी का मुख्यालय टेक्सास के आस्टिन में है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले आल्टेकर कंपनी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, आल्टेकर कंपनी की स्वचालित प्रणालियों और साफ्टवेयर आर्किटेक्चर के विकास का काम देखते हैं।