भारत की परमाणु क्षमता का पाकिस्तान के पास कोई जवाब नहीं है। भारत ने चुपचाप एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है जहां उसके पास समुद्र में परमाणु हथियार (वारहेड) हो सकते हैं, जबकि पाकिस्तान के पास उन्हें ले जाने में सक्षम कोई पनडुब्बी नहीं है और न ही ऐसी पनडुब्बी हासिल करने की कोई ठोस समय-सीमा है।
‘माडर्न डिप्लोमेसी’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपने पनडुब्बी अभियानों में जानबूझकर गोपनीयता बरती है क्योंकि जिस पनडुब्बी की लोकेशन, हथियारों की क्षमता और अधिकृत स्थिति दुश्मन को पता न हो, उसे पहले हमले में निशाना नहीं बनाया जा सकता।
भारत ने ठीक इसी दिशा में एक दशक तक काम किया है, जबकि बाकी दुनिया कहीं और ध्यान दे रही थी। स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपरी) की 2026 की ईयरबुक से संकेत मिलता है कि भारत ने परमाणु हथियारों का जमीन पर भंडारण करने के बजाय उन्हें समुद्र में पनडुब्बियों पर तैनात करना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, हिंद महासागर में लगातार गश्त कर रही परमाणु मिसाइलों से लैस पनडुब्बी को निशाना बना नामुमकिन है। इसकी लोकेशन का पता नहीं होता। इसके वारहेड पहले से मिसाइलों पर लगे होते हैं। इसका गश्त का दायरा बंगाल की खाड़ी से लेकर अगालेगा द्वीप के पास तक फैला हो सकता है, जो लाखों वर्ग किलोमीटर के इलाके को कवर करता है।
ऐसी ताकत के विरुद्ध दुश्मन के हथियार बेकार करने वाले पहले हमले की रणनीति काम नहीं करती, चाहे दुश्मन इस कोशिश में कितनी भी मिसाइलें क्यों न इस्तेमाल कर ले।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की सामुद्रिक परमाणु क्षमता में ‘बाबर-3’ क्रूज मिसाइल शामिल है। इसमें परमाणु क्षमता है और इसे 2027 में ‘अगोस्टा-क्लास’ पनडुब्बी (फ्रांस की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी) पर तैनात किया जा सकता है। इस पारंपरिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार सतह पर आना पड़ता है, इसलिए उनका पता चल जाता है। वे हफ्तों तक ही पानी में रह पाती हैं, महीनों तक नहीं।