अमेरिकी आयोग का दावा खारिज, RSS पर टिप्पणी को भारत ने बताया भ्रामक और पूर्वाग्रहपूर्ण…

भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआइआरएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों की उन टिप्पणियों को खारिज कर दिया, जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

भारत ने अमेरिकी आयोग को पक्षपाती बताया और कहा कि इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन टिप्पणियों को खारिज करते हुए यूएससीआईआरएफ को पक्षपाती संगठन करार दिया।

उन्होंने अपनी द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, हम जानते हैं कि आप जिस संगठन का जिक्र कर रहे हैं, वह भारत के बारे में अपमानजनक और उकसावे वाली टिप्पणियां करता है।

उन्होंने कहा, यह एक पक्षपाती संगठन है। मैं यही कहूंगा कि हमें ऐसे संगठनों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इनका अपना एजेंडा होता है और इनकी कोई विश्वसनीयता नहीं होती।

जायसवाल ने यूएससीआईआरएफ के वरिष्ठ अधिकारियों की टिप्पणियों के बारे में पूछ गए सवाल पर यह जवाब दिया।

बता दें कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से ठीक पहले यूएससीआईआरएफ ने इस संगठन पर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

इसके आयुक्त जीन मिल्स ने कहा था कि आरएसएस के नेताओं को अमेरिका में उच्च-स्तरीय बैठकों या कूटनीतिक सम्मान का अवसर नहीं मिलना चाहिए।

इसके बजाय अमेरिका को धार्मिक आजादी का उल्लंघन करने वाले आरएसएस के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए। जबकि आयोग के प्रमुख आसिफ महमूद ने भी अल्पसंख्यकों पर हमले को लेकर आरएसएस पर बेबुनियाद आरोप लगाए। महमूद पाकिस्तान में जन्मे अमेरिकी नागरिक हैं।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा उच्च प्राथमिकता

एएनआई के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि भारत होर्मुज स्ट्रेट, यमन और सोमालिया जैसे समुद्री इलाकों में भारतीय नाविकों से जुड़ी घटनाओं पर करीबी नजर रख रहा है। नाविकों की सुरक्षा हमारे लिए उच्च प्राथमिकता है।

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