आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि वित्तीय संस्थानाओं को टिक बाक्स आधारित अनुपालन संस्कृति को अपनाने के बजाय नियमों का गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने डिजिटल फ्राड को रोकने के लिए मिलकर काम करने की वकालत की।
डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए सभी मिलकर काम करें
कालेज आफ सुपरवाइजर्स की तीसरी सालाना ग्लोबल कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल चैनल बिना किसी रोक-टोक के सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
हालांकि, वे डिस्क्लोजर और गलत रिकवरी प्रथाओं को भी बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण से पहुंच बढ़ रही है, क्षमता विस्तार हो रहा है और ज्यादा ग्राहक केंद्रित वित्तीय सुविधाएं मिल रही हैं।
साथ ही, यह जोखिम के तरीके को बदल रहा है, जिसके चलते अनुपालन में तेजी की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। मल्होत्रा ने कहा कि असल में, नियामक और विनियमन का मकसद और उद्देश्य एक ही हैं और यह है वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाना और साख को बेहतर करना।
उन्होंने कहा, ‘नियामक और विनियमन लोग एक ही टीम में हैं न कि अलग-अलग कैंप में। हम देश के विकास में सहभागी हैं। इसलिए, हमें एक तरफ वृद्धि और प्रणालीगत स्थिरता और दूसरी तरफ जिम्मेदार नवाचार और ग्राहक सुरक्षा के बीच सही संतुलन बनाने के लिए मिलकर काम करना होगा।’
उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षणीय कार्रवाई और प्रवर्तन को अक्सर रेगुलेशन का सबसे खास पहलू माना जाता है।
इसलिए, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आरबीआइ की इस तरह की कार्रवाई को पयेवेक्षणीय उपकरण के तौर पर देखा जाना चाहिए न कि एकपक्षीय जिम्मेदारी के तौर पर।
नियामक और विनियमन वित्तीय प्रणाली मजबूत करने को एक टीम
ऑटोमेशन से जिम्मेदारियों में कमी नहीं आनी चाहिएउन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण और नवाचार ग्राहक के लिए सही नतीजों के साथ जुड़े हैं। इस कोशिश का एक मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के खतरे से बचाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा, बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों को डिजिटल फ्राड रोकने और उनसे निपटने के लिए अपनी तकनीक को बेहतर बनाते रहना चाहिए। हालांकि, यह एक ऐसी जगह है जहां हमें एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि नियामकीय संस्थाओं को अपनी जरूरतों को बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां डेटा और डिजिटल डिलीवरी नए तरह के जोखिम पैदा करते हैं।
मल्होत्रा ने कहा कि रेगुलेशन और पर्यवेक्षण को टेक्नोलाजी न्यूट्रल रहना चाहिए और आटोमेशन से जिम्मेदारियों में कमी नहीं आनी चाहिए।