रायपुर : लखपति दीदी योजना से महिलाओं ने गढ़ी स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

बस्तर जिले की महिलाएँ आज लखपति दीदी योजना से स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल गढ़ रही हैं।

स्व सहायता समूह की सदस्य कलाबत्ती पोयाम, मंगतीन, कमली कश्यप, प्रमिला ठाकुर और शोभा बघेल ने अपने परिश्रम और संकल्प के बल पर “लखपति दीदी योजना” के अंतर्गत सफलता की नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं।

कलाबत्ती और मंगतीन ने पशुपालन से अर्जित की अतिरिक्त आय

तोकापाल विकासखंड के ग्राम पंचायत भडिसगाँव की उजाला स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती कलाबत्ती पोयाम और मंगतीन, जो पहले सीमित आय से परिवार का भरण – पोषण करती थीं, आज कृषि कार्य और पशुपालन से सालाना लाखों की आमदनी अर्जित कर रही हैं।

ywAAAAAAQABAAACAUwAOw==

समूह से जुड़कर बिहान योजना से जुड़ने के एक पश्चात सामुदायिक निवेश कोष और बैंक लिंकेज की राशि से श्रीमती कलाबत्ती पोयाम ने बतख पालन का और श्रीमती मंगतीन ने बकरी पालन पशुपालन को अतिरिक्त आय के साधन के रूप में विकसित किया।

साथ ही आधुनिक खेती के तौर-तरीके अपनाए है अब उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि उनके घर में आर्थिक समृद्धि आई है और वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।

कमली ने किराना दुकानदार बन तय की आत्मनिर्भरता की राह

वहीं मटकोट निवासी कमली कश्यप और प्रमिला ठाकुर ने कृषि कार्य, पशुपालन के साथ – साथ किराना दुकान संचालन के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं हैं। इन दोनों ने छोटे स्तर से शुरुआत की, लेकिन समूह की सहायता और लखपति दीदी योजना के मार्गदर्शन से आज वे स्थायी आय के साथ परिवार की मजबूत आर्थिक आधारशिला बन चुकी हैं।

बिहान योजना से जुड़ने के एक पश्चात  सामुदायिक निवेश कोष और बैंक लिंकेज की राशि से कमली ने दो एकड़ में मक्का की खेती करते हुए 45 हजार का मुनाफा कमाया, उसी राशि से छोटा किराना की दुकान खोली, साथ में मुर्गी पालन का व्यवसाय भी कर रही।

वहीं प्रमिला ठाकुर ने बिहान योजना से जुड़ने के एक पश्चात  सामुदायिक निवेश कोष और बैंक लिंकेज की राशि से कृषि कार्य और बतख पालन का कार्य के लिए सहयोग मिला।

शोभा कर रहीं जूट निर्माण का कार्य

ग्राम परचनपाल की शोभा बघेल ने अपने कौशल का उपयोग करते हुए सीसल जूट सामग्री निर्माण का कार्य शुरू किया। उनकी मेहनत और रचनात्मकता ने न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि स्थानीय स्तर पर अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर दिए। उनके द्वारा तैयार उत्पाद अब स्थानीय बाजारों में लोकप्रिय हो रहे हैं।

इन सभी महिलाओं की यह यात्रा साबित करती है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएँ भी आर्थिक रूप से सशक्त होकर “लखपति दीदी” बनने की राह पर आगे बढ़ सकती हैं।लखपति दीदी योजना ने न केवल इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार किया, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को भी नई ऊँचाई दी है।

आज ये महिलाएँ समाज में प्रेरणा की मिसाल हैं – आत्मनिर्भर भारत के सशक्त प्रतीक।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *