रायपुर : ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान से जल संरक्षण को मिली नई दिशा, नगपुरा में बने 2 हजार जल अवशोषण ट्रेंच…

नगपुरा वर्षा जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन का बना अनुकरणीय मॉडल

प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत अनेक नवाचार किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में दुर्ग जिले की ग्राम पंचायत नगपुरा में जल संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल विकसित किया गया है, जहां लगभग 2 हजार जल अवशोषण ट्रेंच का निर्माण कर वर्षा जल के अधिकतम संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण की प्रभावी व्यवस्था की गई है। यह पहल अब प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।

        कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के अंतर्गत विकसित आंवला एवं करौंदा बगीचे में वैज्ञानिक पद्धति से जल अवशोषण ट्रेंच तैयार किए गए हैं।

पहले वर्षा ऋतु के दौरान अधिकांश पानी बहकर नालों के माध्यम से निकल जाता था, जिससे मिट्टी की नमी कम होती थी और पौधों की वृद्धि प्रभावित होती थी। ट्रेंच निर्माण के बाद अब वर्षा जल उसी स्थान पर रुककर धीरे-धीरे भूमि में समाहित हो रहा है, जिससे भू-जल स्तर में सुधार के साथ बगीचे की उत्पादकता भी बढ़ रही है।

एक बार की अच्छी वर्षा में 4 हजार घन मीटर जल संरक्षण की क्षमता
       तकनीकी सहायक सुश्री दीप्ति सिंह ने बताया कि प्रत्येक ट्रेंच की क्षमता लगभग 2 घन मीटर है। इस आधार पर एक बार की अच्छी वर्षा में लगभग 4 हजार घन मीटर जल का संरक्षण संभव है।

यदि वर्षा ऋतु के दौरान ट्रेंच कई बार भरते हैं, तो अनुमानित 1.20 लाख घन मीटर वर्षा जल का भू-जल पुनर्भरण किया जा सकता है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि, मृदा संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन तथा भविष्य में सिंचाई एवं पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।

जल संरक्षण के साथ रोजगार सृजन का भी प्रभावी माध्यम
        भूतपूर्व मनरेगा योजना अंतर्गत किए गए इस कार्य से बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं को रोजगार प्राप्त हुआ। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी भी मजबूत हुई है। यह मॉडल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है।

अन्य जिलों के लिए प्रेरणादायी मॉडल
         जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ग्राम पंचायत नगपुरा में विकसित यह मॉडल वर्षा जल के वैज्ञानिक प्रबंधन, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नवाचार राज्य की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेंगे तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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