दुनिया के पहले ट्रिलियनियर और स्पेस एक्सप्लोरेशन के प्रणेता एलन मस्क इन दिनों पैसे से ज्यादा आबादी बढ़ाने (प्रोनैटलिज्म) को लेकर चर्चा में हैं। मस्क का मानना है कि दुनिया के समझदार लोगों को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए और इसके लिए वे स्पर्म डोनेशन को एक बेहतरीन जरिया मानते हैं।
हालांकि, उनकी इस ‘मस्कियन सोच’ के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन देशों के कड़े कानून हैं जहां स्पर्म डोनर की पहचान गुप्त रखी जाती है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल विज्ञान खड़ा करता है—क्या एक जीनियस पिता के स्पर्म से पैदा होने वाला बच्चा भी जीनियस ही होगा?
क्योंकि, वैज्ञानिक रिसर्ज के अनुसार, बच्चों में बुद्धिमत्ता (Intelligence) पिता से ज्यादा मां के जीन्स से ट्रांसफर होती है।
क्या कहते हैं मस्क?
दरअसल, स्पेस एक्सप्लोरेशन के प्रणेता एलन मस्क ने हाल ही में दुनिया का सबसे बड़ा IPO लॉन्च किया है। वह जितने अमीर हैं, उतने ही ताकतवर भी। साथ ही, बहुत तेज दिमाग वाले भी। उन्हें और क्या चाहिए? बच्चे। एलन मस्क का पक्का मानना है कि उन्हें नॉर्दर्न एलिफेंट सील (जो 100 मादाओं को प्रेग्नेंट कर सकती हैं) की तरह बेधड़क बच्चे पैदा करने चाहिए।
मस्क का मानना है कि स्मार्ट लोगों (जीनियस) को ज्यादा बच्चे पैदा करने में मदद करनी चाहिए। मस्क की सोच के हिसाब से, ऐसा करना समाज के लिए अच्छा है। ऐसा करने का सबसे असरदार तरीका है अपना स्पर्म डोनेट करना।
बता दें कि 2024 में डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के कुछ समय बाद मस्क के स्पर्म डोनेशन के जुनून के बारे में मीडिया में खबरें आईं।
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्क ने सिलिकॉन वैली की एक डिनर पार्टी में शामिल एक कपल को अपना स्पर्म डोनेट करने का ऑफर दिया था। हालांकि, मस्क ने इस बात को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया।
सवाल है कि असली पिता कौन है?
मस्क और उनके जैसे तमाम संभावित स्पर्म डोनर्स (जो चाहते हैं कि दुनिया को पता चले कि उनके स्पर्म से बच्चे पैदा हुए हैं) के सामने सबसे बड़ी कानूनी अड़चन है। दुनिया के अधिकांश हिस्सों में स्पर्म डोनर की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। इसके तहत न तो बच्चे को अपनाने वाले माता-पिता को डोनर का नाम बताया जाता है, और न ही खुद डोनर कानूनी तौर पर अपनी पहचान उजागर कर सकता है।
हालांकि, अपवाद भी हैं जहां डोनर की पहचान बताना आसान है, जैसे- UK, जर्मनी, नीदरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, फ़िनलैंड और US के कुछ राज्य जैसे कैलिफोर्निया, रोड आइलैंड, कनेक्टिकट। वहीं भारत में ICMR की गाइडलाइंस के मुताबिक डोनर की पहचान गुप्त रखना जरूरी है।
डोनर की पहचान को लेकर सबसे बड़ी समस्या यह है कि सभी डोनर अपनी पहचान जाहिर करने के लिए तैयार नहीं होते। वहीं, सभी लेने वाले भी अनजान डोनर के विचार से सहमत नहीं होते। अलग-अलग देशों में स्पर्म बैंक और बायोएथिसिस्ट (जैविक नैतिकता के जानकार) के बीच भी अपनी-अपनी अंदरूनी बहसें चलती रहती हैं। लेकिन गुमनामी को लेकर जो आम सहमति थी, उसमें अब बदलाव आ रहा है।
सही जगह का चुनाव
अगर आप एलन मस्क के जैसी सोच रखने वाले डोनर, तो आपके लिए उन देशों या राज्यों में स्पर्म डोनेट करना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होगा जहां कानूनन मां और बच्चे को डोनर की पहचान जानने का अधिकार होता है। करीब एक दर्जन बच्चों के पिता और आबादी बढ़ाने (Pro-natalism) के कट्टर समर्थक मस्क, शायद अब दौलत कमाने से ज्यादा स्पर्म डोनेट करने को लेकर गंभीर हैं।
हालांकि, दुनिया के सबसे अमीर इंसान के लिए यहां एक पेच है। अधिकांश देशों में स्पर्म डोनर के रूप में रजिस्टर्ड होने के लिए कई कड़े दौर से गुजरना पड़ता है, जिसमें विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड और निजी सवालों के जवाब देना शामिल है। जाहिर है, मस्क जैसे रसूखदार इंसान को ऐसी पूछताछ की आदत नहीं होगी। लेकिन एक बुद्धिमान व्यक्ति होने के नाते, उन्हें इसके नफे-नुकसान का आकलन करके सही जगह रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए।
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