एक जागरूक नागरिक जब व्यवस्था के ढुलमुल रवैये के खिलाफ खड़ा होता है, तो बदलाव की राह आसान हो जाती है।
दिल्ली में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर सूचना का अधिकार (आरटीआइ) के तहत तीन साल तक चली लंबी कानूनी जंग आखिरकार रंग लाई है।
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने पाया है कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े मामले में जानकारी देने में “जानबूझकर और पक्के तौर पर रुकावट” डाली है।
इसके लिए सीआइसी ने एमसीडी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
साथ ही, सीआइसी ने आवेदक को 10 हजार रुपये का मुआवजा देने और एनजीओ को किए गए पेमेंट, नसबंदी और वैक्सीनेशन के डाटा समेत सभी रिकार्ड्स की जानकारी खुद से सार्वजनिक करने का आदेश दिया है।
यह मामला दिसंबर 2022 का है, जब अक्षय कुमार मल्होत्रा नामक एक नागरिक ने एमसीडी से आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण, शेल्टर्स की स्थिति और एनजीओ को दिए गए धन के खर्च का ब्योरा मांगा था।
एमसीडी ने जानकारी देने के बजाय आवेदक को एनजीओ के पास भटकने के लिए छोड़ दिया। सीआइसी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए जन सूचना अधिकारी (पीआइओ) पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
सीआइसी ने साफ कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर एमसीडी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और आरटीआइ अधिनियम की धारा 4(1)(बी) का खुला उल्लंघन किया है। इस कानूनी लड़ाई के दौरान आवेदक को मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी।