यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने नीट यूजी 2026 में प्रणालीगत विफलता का आरोप लगाते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को भंग करने की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि संवैधानिक और संसदीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद द्वारा पारित कानून के जरिए एक नयी वैधानिक टेस्टिंग अथॉरिटी गठित की जाए। इस नये गठित निकाय के पास परिभाषित कानूनी अधिकार, पारदर्शिता के मानक और विधायिका के प्रति सीधी जवाबदेही होनी चाहिए।
नई टेस्टिंग अथॉरिटी का हो गठन
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट राजस्थान में पंजीकृत एक संस्था है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने वकील रितु रेनीवाल के जरिए दाखिल की गई याचिका में कहा है कि संसद से कानून पारित कर नयी विधायी टेस्टिंग अथॉरिटी बनाने से संस्था के अध्यक्ष और उसके सदस्य कानून द्वारा तय किये जाएंगे, जिससे यह संस्था सीधे तौर पर विधायिका के प्रति जवाबदेह होगी।
शुरू से अंत तक सीएजी ऑडिट अनिवार्य करने से वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। पेपर लीक होने पर सख्त सजा और छात्रों के लिए अनिवार्य शिकायत तंत्र होने से कानूनी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित होंगे। इससे परीक्षा के मुख्य कामों में निजी वेंडरों की भूमिका सीमित होगी जिससे कि आउटसोर्सिंग से जुड़ी अस्पष्टता खत्म होगी।
याचिका में एनटीए पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में एनटीए की वर्तमान कानूनी स्थिति, जवाबदेही की शून्यता पैदा करती है। कहा है कि यूपीएससी संवैधानिक संस्था है और एसएससी एक वैधानिक संस्था है जबकि इसके विपरीत एनटीए सीधे तौर पर संसद के प्रति जवाबदेह नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि नीट यूजी भारत में ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमीशन का एकमात्र माध्यम है और सीधे तौर पर 22.7 लाख छात्रों के शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य को तय करता है।
इस परीक्षा की शुचिता में बार-बार होने वाली सेंध, संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में मिले समानता और जीवन व आजीविका के मूल अधिकार का उल्लंगन है क्योंकि राज्य निष्पक्ष और मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया उपलब्ध कराने में विफल रहा।
कहा गया है कि एनटीए द्वारा सुरक्षा उपायों के बारे में आश्वासन दिए जाने के बावजूद नीट यूजी 2026 परीक्षा की शुचित भंग हुई। तीन मई 2026 को आयोजित हुई नीट यूजी परीक्षा हाईटेक सुरक्षा उपायों (जीपीएस ट्रैकिंग, एआइ मदद वाले सीसीटीवी और बायोमेट्रिक सत्यापन) के दावों के बावजूद, एक संगठित गेसपेपर रैकेट द्वारा प्रभावित हुई।