अमेरिका और रूस के बीच अलास्का में होने वाली अहम शिखर वार्ता से पहले रूस और चीन ने संयुक्त सैन्य गतिविधियों से कड़ा संदेश भेजा है।
संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, खुफिया जहाजों की गतिविधियां और रणनीतिक ठिकानों के पास मौजूदगी ने इस बैठक के माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
जापान के निकट रूसी और चीनी नौसेनाओं ने बड़े पैमाने पर संयुक्त युद्धाभ्यास किया, जिसमें निगरानी, मिसाइल-रोधी संचालन और समुद्री नाकेबंदी जैसी गतिविधियां शामिल थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सीधे तौर पर अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों (जापान और दक्षिण कोरिया) के लिए एक संदेश है कि मॉस्को और बीजिंग अब सैन्य स्तर पर भी अधिक समन्वय में हैं।
इसके अलावा, जापान के पास रूसी खुफिया जहाजों की आवाजाही बढ़ी है, जिसे अमेरिका-समर्थक सुरक्षा विश्लेषक अलास्का वार्ता से पहले रणनीतिक दबाव के तौर पर देख रहे हैं।
अमेरिकी B-1B लांसर बॉम्बर्स की तैनाती
इन सैन्य गतिविधियों के बीच, अमेरिका ने तीन B-1B Lancer रणनीतिक बॉम्बर्स नॉर्वे में तैनात किए हैं। यह 2021 के बाद पहली बार है जब किसी NATO देश में अमेरिकी बमवर्षक विमान तैनात हुए हैं।
ये विमान यूरोपीय सहयोगियों के साथ प्रशिक्षण मिशन में हिस्सा लेंगे, जिसका उद्देश्य रूस के खिलाफ NATO की सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है।
अलास्का वार्ता से पहले बढ़ा दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को अलास्का में होने वाली बैठक पहले ही यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा आपूर्ति और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों के कारण बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।
विश्लेषकों के अनुसार, रूस–चीन की संयुक्त सैन्य सक्रियता और अमेरिकी बमवर्षकों की यूरोप में तैनाती, दोनों ही वार्ता के “शक्ति प्रदर्शन” वाले दौर को दर्शाते हैं।