पुतिन-किम जोंग उन संग दिखे शी जिनपिंग, विजय परेड के जरिए आखिर क्या साधना चाहते हैं मकसद?…

दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के 80 साल पूरे होने पर चीन अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने जा रहा है। बीजिंग में आयोजित की जा रही इस सैन्य परेड में दुनियाभर के उन देशों को राष्ट्राध्यक्षों को बुलाया गया है जो अमेरिका का खुला विरोध करते हैं।

जानकारों का कहना है कि शी जिनपिंग खुद को एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। वहीं कई देशों से अमेरिका के टैरिफ वॉर के बीच उन्हें अच्छा मौका भी मिल गया है।

इस सैन्य परेड में उन्होंने उत्तर कोरिया के विवादित राष्ट्रपति किम जोंग उन को भी आमंत्रित किया है। इसके अलावा रूस, ईरान और म्यांमार के नेता मिलिट्री परेड का हिस्सा होंगे।

डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चुनौती

माना जा रहा है कि इस परेड के जरिए शी जिनपिंग डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चुनौती दे रहे हैं। 3 सितंबर को होने वाली इस परेड में व्लादिमीर पुतिन औऱ किम जोंग उन की उपस्थिति बेहद अहम है।

पहली बार है जब दोनों नेता एक साथ दिखाई देंगे। इसके अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान भी बीजिंग पहुंचेंगे। इसके अलावा म्यांमार जुंटा चीफ मिन ऑन्ग भी चीन पहुंच रहे हैं। वह विरले ही कोई विदेश यात्रा करते हैं।

इस परेड के मौके पर पश्चिम से केवल दो ही नेता चीन पहुंच रहे हैं। इसमें स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और सर्बिया के राष्ट्रपति शामिल हैं। स्लोवाकिया भी रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का विरोध करता है।

कैसे शक्ति प्रदर्शन करेगा चीन?

इस परेड में चीन अपने फाइटर जेट, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और हाइपरसोनिक हथियारों का प्रदर्शन करने वाला है। चीन अपने डीएफ-26 इंटरमीडिएट रेंज बलिस्टिक मिसाइल का भी प्रदर्शन कर सकता है।

इसके अलावा अपनी नई एंटी शिप मिसाइल यिंग का भी चीन प्रदर्शन करेगा। इस कार्यक्रम में चीन के हजारों सैनिक एक साथ परेड करेंगे। वहीं दुनिया के कई ताकतवर देशों के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद रहेंगे।

चीन के इस शक्ति प्रदर्शन की वजह से आम लोगों को खासी दिक्कत हो रही है। पिछली बार ऐसा आयोजन 2015 में किया गया था। तब तीन दिन की छुट्टी का ऐलान कर दिया गया था।

क्या दिखाना चाहते हैं शी जिनपिंग

जानकारों का कहना है कि इस सैन्य प्रदर्शन के जरिए शी जिनपिंग अमेरिका समेत पश्चिम को बताना चाहते हैं कि वह कितना मजबूत हैं। इसके अलावा वह खुद को पुतिन की तरह वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

इससे पहले एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी भारत समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष चीन पहुंचे थे।

जानकारों का कहना है, ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस सैन्य परेड से वे अमेरिका के विरुद्ध अपनी त्रिपक्षीय एकता प्रदर्शित करेंगे।

यह ऐसा आयोजन होगा जिसमें किम अपने 14 साल के शासन के दौरान किसी प्रमुख बहुपक्षीय कार्यक्रम में पहली बार शिरकत करेंगे। तीनों देशों में से किसी ने भी इन तीनों नेताओं की निजी त्रिपक्षीय बैठक की पुष्टि नहीं की है।

उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ (केसीएनए) ने मंगलवार सुबह खबर दी कि किम चीन में आयोजित हो रहे समारोह में शामिल होने के लिए सोमवार को अपनी विशेष ट्रेन से प्योंगयांग से बीजिंग के लिए रवाना हो गए।

‘केसीएनए’ ने विदेश मंत्रालय में अधिकारी किम चोन इल का हवाला देते हुए बताया कि किम जोंग उन की इस यात्रा के दौरान उनके साथ विदेश मंत्री चोए सोन हुई समेत शीर्ष अधिकारी भी मौजूद हैं।

दक्षिण कोरिया की मीडिया की खबर के अनुसार किम जोंग उन की ट्रेन के सोमवार रात को चीन के शहर डाडोंग पहुंचने और मंगलवार को बीजिंग पहुंचने की संभावना है।

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