यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने में जुटे भारत सरकार के अधिकारियों के लिए शनिवार का दिन खासा व्यस्तता भरा रहा।
इससे भी ज्यादा व्यस्तता का दिन रविवार को होने की संभावना है जब दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के बीच 27 जनवरी को भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) शिखर सम्मेलन में होने वाले कुछ दूसरे समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण विमर्श का दौर चलेगा।
इसके लिए ईयू की हाई रिप्रेजेंटेटिव और वाइस-प्रेसिडेंट काया कालस शनिवार को नई दिल्ली पहुंची हैं।
सूत्रों ने बताया है कि आगामी शिखर सम्मेलन का एजेंडा इतना व्यापक है कि सिर्फ 25 व 26 जनवरी को ही नहीं बल्कि 27 जनवरी को होने वाली बैठक से कुछ समय पहले तक अगर विमर्श चलता रहे तो इसमें आश्चर्य वाली कोई बात नहीं है।
उधर, यूरोपीय संघ की प्रेसिडेंट उर्सूला वान डेर लायन ने भारत आने से पहले भावी एफटीए को लेकर पूरा माहौल बना दिया है।
इंटनेट मीडिया पर उन्होंने भारत व ईयू के बीच होने वाले एफटीए को ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ बताते हुए लिखा- ‘हम भारत और ईयू के बीच एफटीए को अंतिम रूप दे रहे हैं। जल्द ही दिल्ली में मिलते हैं।’
तीन दिन पहले, उन्होंने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक में कहा था कि ईयू भारत के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता करने जा रहा है जो दो अरब लोगों के बाजार का निर्माण करेगा, जोकि दुनिया की एक चौथाई जीडीपी के बराबर है।
उन्होंने भारत को वैश्विक विकास का केंद्र और इस सदी के पावर हाउस के रूप में भी चिह्नित किया था।
एफटीए के संदर्भ में, दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच सबसे अधिक विमर्श रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदारी को लेकर हो रहा है।
यह समझौता दोनों पक्षों के बीच सिक्योरिटी एंड डिफेंस पार्टनरशिप (एसडीपी) को मजबूत करेगा। अमेरिका-चीन के तनाव और रूस-यूक्रेन संघर्ष को देखते हुए यह समझौता भारत और ईयू की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा और भारत को यूरोपीय क्षेत्र का एक प्रमुख रक्षा सहयोगी स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, युद्धक विमान, पनडुब्बी, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन टेक्नोलॉजी में सह-विकास और सह-निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे ईयू के देशों जैसे फ्रांस और जर्मनी की प्रमुख रक्षा उपकरण निर्माता कंपनियों को भारत में संयुक्त निर्माण इकाई स्थापित करने में आसानी होगी।
एक अधिकारी के अनुसार, ईयू के साथ रक्षा सहयोग समझौता भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा होगा, जिसके तहत रूस और अमेरिका पर रक्षा क्षेत्र में निर्भरता कम की जा सकेगी।