साइबर फ्राड पर लगाम के लिए वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामले के विभाग ने सभी बैंकों को जल्द से जल्द म्यूलहंटर डाट एआई प्रणाली को अपनाने का निर्देश दिया है।
इस एआई प्रणाली को आरबीआइ के इनोवेशन हब यूनिट के विकसित किया है।
वर्ष 2026 में दर्जन भर से अधिक वित्तीय संस्था म्यूलहंटर को अपना चुके हैं, लेकिन अब भी काफी वित्तीय संस्थानों ने इसे नहीं अपनाया है। म्यूलहंटर एआई प्लेटफार्म से मिलने वाली म्यूल खातों की जानकारी 90 प्रतिशत तक सही पाई गई है।
बैंकों को मैनुअल तरीके से म्यूल एकाउंट पर नजर रखने के लिए काफी मशक्कत करनी होती है और उसके बाद भी साइबर अपराधी म्यूल एकाउंट का इस्तेमाल करने में सफल हो जाते हैं।
साइबर अपराधी कम ट्रांजेक्शन वाले खातों में पैसा मंगाते हैं और आम तौर पर इसकी जानकारी खाताधारक को नहीं होती है।
कैसे फ्रॉड को करता है ट्रैक
म्यूलहंटर एआई रियल टाइम पर ट्रांजेक्शन को ट्रैक करता है। लाखों खातों के बीच म्यूलहंटर एआई ट्रांजेक्शन के पैटर्न को देखकर फ्राड को ट्रैक करने में सक्षम है।
म्यूलहंटर एआई को विकसित करने के दौरान पाया गया कि साइबर अपराधी मुख्य रूप रात में खासकर रात के 11 से एक बजे के बीच म्यूल खातों में ट्रांजेक्शन करते हैं।
इसे ध्यान में रखा गया और म्यूलहंटर एआई इस दौरान होने वाले ट्रांजेक्शन पर विशेष ध्यान रखता है। मैनुअल रूप में इस दौरान होने वाले ट्रांजेक्शन की निगरानी नहीं हो पाती है। म्यूलहंटर एआआई आरबीआइ इनोवेशन हब की तरफ से मुफ्त में मुहैया कराया जाता है।
हालांकि म्यूलहंटर खातों को ट्रैक करने के लिए और इसके माध्यम से साइबर अपराध को पूरी तरह खत्म करने के लिए आरबीआइ खाता में अलर्ट सिस्टम लगाने पर भी विचार कर रहा है।
मतलब एक सीमा से अधिक रकम आने पर बैंक को उस खाते के बारे में अलर्ट आ जाएगा। अभी इस संबंध में आरबीआइ ने मसौदा जारी किया है।