चांद पर लंबी अवधि तक मिशन संचालन की तैयारी, 200 दिनों तक सक्रिय रह सकेंगे लैंडर; परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ एडवांस्ड हीटर विकसित करेगा ISRO…

भारत ने अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास ऐतिहासिक ‘साफ्ट लैंडिंग’ की थी, लेकिन विक्रम लैंडर केवल एक चंद्र-दिवस यानी पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर ही काम कर सका था।

भारत अब ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिससे भविष्य के लूनर लैंडर चांद पर 14 दिनों के बजाय 200 दिनों तक काम कर सकेंगे।

चंद्रमा पर दिन और रात पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होती है।

चांद की लंबी और बेहद ठंडी रात में लैंडर को बचना बड़ी चुनौती रही है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने शनिवार को कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एडवांस्ड आर्टिफिशियल हीटर बनाने का प्रयास कर रहा है।

जिसकी मदद से भविष्य के लूनर लैंडर्स को चंद्रमा पर रात के समय -200 डिग्री सेल्सियस के बेहद कम तापमान में भी 100 से 200 दिनों तक चालू रखा जा सकेगा।

नारायणन ने कहा कि चंद्रमा पर रात में भयंकर ठंड होती है और सूर्य की रोशनी न होने से सोलर पैनल काम नहीं करते। इसलिए ऐसे एडवांस्ड आर्टिफिशियल हीटिंग सिस्टम विकसित करने की कोशिश की जा रही है जो चांद पर रात के दौरान स्पेसक्राफ्ट के पार्ट्स को सुरक्षित रख सकें।

इस प्रयास में सफलता मिली तो स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा पर कई दिन-रात को झेल सकेंगे। मिशन की अवधि लंबी होने से विज्ञानी ज़्यादा समय तक प्रयोग कर सकेंगे और वैज्ञानिक डाटा जुटा सकेंगे।

गौरतलब है कि 23 अगस्त 2023 को, भारत चंद्रयान-3 मिशन के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास अंतरिक्षयान उतारने वाला पहला देश बनकर इतिहास रच दिया था। हालांकि, विक्रम लैंडर केवल एक चंद्र दिवस, यानी पृथ्वी के लगभग 14 दिनों तक ही काम कर पाया, क्योंकि यह बिजली बनाने के लिए सौर ऊर्जा पर निर्भर था।

एक बार जब चंद्रमा पर रात शुरू हुई, तो सूरज की रोशनी न होने और तापमान के बहुत ज़्यादा गिर जाने के कारण अंतरिक्षयान के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का काम करते रहना नामुमकिन हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *