तेलंगाना के कोमाराम भीम आसिफाबाद जिले में सड़क संपर्क खराब होने की वजह से इमरजेंसी हेल्थकेयर तक पहुंचने को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। वांकिडी मंडल के सरकेप्पली गांव की एक गर्भवती महिला को बैलगाड़ी से उस एम्बुलेंस तक ले जाना पड़ा जो रास्ते में ही रुकी हुई थी।
सरकेपल्ली की रहने वाली करिश्मा को 5 सितंबर को प्रसव पीड़ा शुरू हुई और उनके परिवार वालों ने तुरंत मेडिकल मदद के लिए 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी। हालांकि, बताया जा रहा है कि कीचड़ और खराब सड़क की वजह से एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई और मारेपल्ली के पास फंस गई।
एम्बुलेंस तक पहुंचने के लिए लिए बैलगाड़ी का सहारा
एम्बुलेंस गांव की ओर तो चली, लेकिन मारेपल्ली के आगे सड़क कीचड़ वाली और मुश्किल होने के कारण आगे नहीं बढ़ पाई। एम्बुलेंस के गांव तक न पहुंच पाने पर, करिश्मा के परिवार वालों और स्थानीय लोगों ने उन्हें फंसी हुई इमरजेंसी गाड़ी तक ले जाने के लिए बैलगाड़ी का इंतजाम किया। उन्हें मुश्किल रास्ते से ले जाकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया।
करिश्मा ने बच्ची को जन्म दिया
इसके बाद एम्बुलेंस करिश्मा को वांकिडी सरकारी अस्पताल ले गई, जहां उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। खबरों के अनुसार, प्रसव के बाद मां और नवजात बच्ची दोनों सुरक्षित हैं।
मानसून में और खराब हुई सड़कों की हालत
इस घटना ने सरकेपल्ली और मारेपल्ली को जोड़ने वाली सड़क की हालत को लेकर, खासकर मानसून के दौरान, स्थानीय लोगों में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कीचड़ भरे रास्तों और सड़क की खराब हालत के कारण दोपहिया वाहनों, ऑटो और अन्य गाड़ियों का इस इलाके से गुजरना मुश्किल हो जाता है, जिससे मेडिकल इमरजेंसी के समय खतरा और बढ़ जाता है।
इमरजेंसी गाड़ियां भी गांव तक नहीं पहुंच पाती- स्थानीय
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इमरजेंसी गाड़ियां गांव तक नहीं पहुंच पाती हैं, तो गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उन्होंने अधिकारियों से सड़क संपर्क को बेहतर बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की है कि एम्बुलेंस सेवाएँ बिना किसी रुकावट के सरकेपल्ली तक पहुंच सकें।
अगस्त 2024 में हुई थी अजन्मे बच्चे की मौत
इससे पहले अगस्त 2024 में, कोमाराम भीम आसिफाबाद में एक गर्भवती महिला को बैलगाड़ी से लगभग 2.5 किलोमीटर का सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा था, क्योंकि कीचड़ और खराब सड़कों के कारण 108 एम्बुलेंस उसके गांव तक नहीं पहुंच पाई थी। उस मामले का दुखद अंत हुआ, अस्पताल में इलाज मिलने से पहले ही अजन्मे बच्चे की मौत हो गई।