तमिलनाडु में सियासी बवाल: 50 करोड़ के आरोप, हॉर्स-ट्रेडिंग और गिरफ्तारी पर TVK-DMK आमने-सामने…

तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सियासी भूचाल आया हुआ है। सत्ताधारी तमिलगा वेत्रि कड़गम (टीवीके) और मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के बीच विधायकों की खरीद-फरोख्त (हार्स-ट्रेडिंग) को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार और विपक्ष के बीच शह-मात के इस खेल ने राज्य के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

विपक्षी खेमे पर टीवीके का पलटवार: तीन लोग गिरफ्तार

मामले की शुरुआत तब हुई जब सत्ताधारी टीवीके के नेता और ऊर्जा संसाधन मंत्री आर. निर्मल कुमार ने द्रमुक पर उनकी पार्टी के विधायकों को प्रलोभन देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस में सनसनीखेज दावा किया कि द्रमुक नेतृत्व पिछले 40 दिनों से ‘शॉर्ट-कट’ के जरिये सरकार बनाने की फिराक में है।

मंत्री के मुताबिक, द्रमुक नेता एम.के. स्टालिन और उदयनिधि के इशारे पर वी. सेंथिलबालाजी जैसे लोग टीवीके के विधायकों से संपर्क साध रहे थे।

विधायकों को पाला बदलने के लिए 10 करोड़ से लेकर 50 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम रकम की पेशकश की गई। इस मामले में टीवीके के एक विधायक की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक आरोपित सेंथिलबालाजी और उनके भाई अशोक का करीबी बताया जा रहा है।

द्रमुक का पलटवार और टीवीके का गठबंधन मंथन

दूसरी तरफ, विपक्षी दल द्रमुक ने इस लड़ाई को सीधे राजभवन तक पहुंचा दिया है। द्रमुक के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर को याचिका सौंपकर मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ जांच की मांग की है।

द्रमुक का आरोप है कि एमडीएमके प्रमुख वाइको ने खुद सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि मुख्यमंत्री विजय ने उनके दो विधायकों (टी.एम. राजेंद्रन और एस. सेंथिल सेलवन) को पद से इस्तीफा देने और पाला बदलने के लिए लुभाने का प्रयास किया था।

द्रमुक ने इस मामले में सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय से एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है, हालांकि टीवीके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

इस भारी राजनीतिक उठापटक के बीच, मुख्यमंत्री विजय ने आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर अपनी सहयोगी पार्टियों (कांग्रेस, वीसीके, आइयूएमएल और एमडीएमके) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।

हालांकि, वामपंथी दलों ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी। लगभग एक घंटे चली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सहयोगियों के साथ मिलकर राज्य में एक स्थिर सरकार देना और पांच साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करना था।

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