पाकिस्तान में सियासी हलचल तेज, तख्तापलट की अटकलों से शहबाज सरकार परेशान…

गृह मंत्री मोहसिन नकवी के हालिया बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल आ गया है।

पाकिस्तान में फिर तख्तापलट की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस बयान के बाद सरकार के सामने प्रदर्शन पर तीखी बहस छिड़ गई है, जिसके चलते सरकार ने मंत्रालयों के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए एक कड़ी जवाबदेही प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस्लामाबाद में उस वक्त हड़कंप मच गया जब आंतरिक मंत्री और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने देश की शासन प्रणाली को पूरी तरह से विफल घोषित कर दिया। उन्होंने देश के प्रशासनिक ढांचे पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया।

नकवी के इस चौंकाने वाले बयान ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है और मौजूदा सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बयान के बाद से विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है, जबकि आम जनता के बीच प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर असंतोष और अधिक गहरा गया है।

मोहसिन नकवी का वो बयान जिसने मचाई खलबली

यह सारा विवाद 30 जुलाई को इस्लामाबाद में पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट के दौरान गृह मंत्री मोहसिन नकवी द्वारा दिए गए एक बयान के बाद शुरू हुआ। नकवी ने खुले तौर पर कहा कि पाकिस्तान का मौजूदा शासन ढांचा पूरी तरह ढह चुका है और अब यह देश की चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम नहीं है।

उन्होंने नए प्रशासनिक इकाइयों के निर्माण और बुनियादी सुधारों की वकालत करते हुए चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो अगले एक दशक तक देश इन्हीं समस्याओं से जूझता रहेगा।

आरोपों पर शहबाज सरकार की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान की जियो न्यूज के अनुसार, पीएम प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सभी संघीय मंत्रालयों और विभागों के प्रदर्शन की व्यापक समीक्षा का आदेश दिया है। इससे भविष्य में संघीय कैबिनेट में बड़े फेरबदल की संभावनाएं तेज हो गई हैं। पीएम कार्यालय ने सभी संघीय मंत्रालयों को फरवरी 2024 से लेकर अब तक की अपनी उपलब्धियों और प्रमुख पहलों का विस्तृत ब्यौरा एक निर्धारित प्रारूप में सौंपने का सख्त निर्देश दिया है।

इस समीक्षा के दायरे में आर्थिक और वित्तीय मामलों के 18 मंत्रालय, कानून, सुरक्षा और प्रशासनिक मामलों के 14 मंत्रालय और सामाजिक सेवाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े 9 मंत्रालय आएंगे।

सभी मंत्रालयों को अपनी हर उपलब्धि का दस्तावेजी सबूत देना अनिवार्य किया गया है। अधूरी रिपोर्ट या बिना सबूत वाले दावों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा। इसके अलावा सीपीईसी अथॉरिटी, योजना आयोग, वार्षिक विकास कार्यक्रम के कार्यान्वयन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भी कड़ी समीक्षा की जाएगी ताकि सरकारी कामकाज में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

राणा सनाउल्लाह का पलटवार

प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने नकवी के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे उनकी निजी राय करार दिया। जियो न्यूज़ से बात करते हुए सनाउल्लाह ने कहा कि उन्हें नकवी का बयान बिल्कुल समझ नहीं आया और यह पूरी तरह बेतुका था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाने का अधिकार केवल संसद और संविधान के पास है, और इसे महज सार्वजनिक बहस से लागू नहीं किया जा सकता। इसके लिए एक राष्ट्रीय आयोग का गठन जरूरी है जो वित्तीय मामलों और सीटों के बंटवारे पर फैसला करेगा।

साथ ही, सनाउल्लाह ने उन अफवाहों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें सैन्य एस्टेब्लिशमेंट द्वारा नए प्रशासनिक ढांचे के लिए कोई समय-सीमा तय करने की बात कही जा रही थी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पीएमएल-एन अध्यक्ष नवाज शरीफ ने नकवी के लहजे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें इस मुद्दे पर आगे कोई भी बयान देने से सख्त मना कर दिया है।

ख्वाजा आसिफ का बड़ा दावा

इस पूरी खींचतान में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयानों ने और हवा दे दी, जिन्होंने नकवी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। आसिफ ने दावा किया कि नकवी कैबिनेट के सबसे शक्तिशाली मंत्री हैं और कई मामलों में वे सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को भी जवाबदेह नहीं हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गृह मंत्री होने के बावजूद नकवी सरकारी सिस्टम का हिस्सा नहीं लगते, क्योंकि वे बमुश्किल दो-तीन कैबिनेट बैठकों में शामिल हुए हैं और पद संभालने के बाद से केवल सात-आठ बार ही संसद आए हैं।

आसिफ ने यह कहकर अपनी बात खत्म की कि अगर देश का गृह मंत्री ही सिस्टम की शिकायत कर रहा है, तो सरकार को बस अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर घर चले जाना चाहिए।

असीम मुनीर का मुशर्रफ मॉडल

बलूचिस्तान और पीओके में बढ़ते जनाक्रोश के बीच, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर सत्ता पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की फिराक में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मुनीर अपने खास मोहरे, मोहसिन नकवी के जरिए देश में नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाने का माहौल तैयार कर रहे हैं।

इसका असली मकसद मुनीर के लिए परवेज मुशर्रफ की तर्ज पर राष्ट्रपति और सेना प्रमुख, दोनों पदों पर काबिज होकर पूरी सत्ता हथियाने का रास्ता साफ करना है।

नकवी ने सुशासन और न्याय व्यवस्था के नाम पर नए प्रांतों की वकालत की है, जिसे पाकिस्तानी सेना का भी खुला समर्थन मिला है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ पीएमएल-एन और पीपीपी इस मुद्दे पर खामोश हैं।

दरअसल, इन दोनों राजनीतिक दलों की मुख्य ताकत क्रमशः पंजाब और सिंध प्रांतों पर टिकी है। यदि प्रांतीय सीमाओं में कोई भी बदलाव होता है, तो इन पार्टियों का राजनीतिक वर्चस्व और प्रभाव पूरी तरह से खत्म हो सकता है।

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