अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेहरान में राजनीतिक खींचतान बढ़ी, सत्ता संघर्ष हुआ तेज…

पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान टकराव गहराता जा रहा है और इसके असर से वैश्विक ऊर्जा बाजार दबाव में है। इसी बीच तेहरान से आ रही खबरें बताती हैं कि ईरान की सत्ता के गलियारे में सब कुछ सामान्य नहीं है।

राष्ट्रपति मसूज पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ के बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची को लेकर असहजता खुलकर सामने आने लगी है।

ब्रिटेन स्थित संस्था ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों शीर्ष नेताओं को शिकायत है कि अराघची कूटनीतिक फैसलों में राष्ट्रपति कार्यालय को दरकिनार कर सीधे रिवोल्यूशनरी गार्ड (आइआरजीसी) से तालमेल बना रहे हैं।

आरोप यह भी है कि उन्होंने विदेश मंत्री की भूमिका से ज्यादा आइआरजीसी कमांडर अहमद वाहिदी के सहयोगी की तरह काम किया है।

सूत्रों का कहना है कि अराघची कई अहम फैसलों में राष्ट्रपति को भरोसे में लिए बिना ही वाहिदी के साथ समन्वय कर रहे हैं और उन्हीं के निर्देशों पर नीतियां आगे बढ़ा रहे हैं।

पेजेशकियान हैं नाराज

इससे राष्ट्रपति पेजेशकियान के भीतर नाराजगी गहराती जा रही है। उन्होंने अपने करीबी दायरे में साफ संकेत दिया है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो अराघची को पद से हटाने तक का फैसला लिया जा सकता है।

राष्ट्रपति खेमे की चिंता यह भी है कि संवेदनशील कूटनीतिक दौर में विदेश मंत्री का झुकाव सैन्य नेतृत्व की ओर बढ़ने से राजनीतिक नेतृत्व की पकड़ कमजोर पड़ रही है।

यह विवाद ऐसे समय उभरा है, जब पहले से ही शासन तंत्र के भीतर मतभेदों की खबरें सामने आ रही थीं।रिपोर्ट के अनुसार, वाहिदी का तर्क है कि युद्धकालीन स्थिति में सभी संवेदनशील प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति और नियंत्रण सीधे रिवोल्यूशनरी गार्ड के हाथ में होना चाहिए।

विधायी मोर्चे पर भी यह खींचतान साफ नजर आई। 27 अप्रैल को कट्टरपंथी सांसदों के एक समूह ने वार्ता टीम के समर्थन में जारी संसदीय बयान पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया।

हालांकि 261 सांसद इसके पक्ष में थे, लेकिन सईद जलीली से जुड़े नेताओं के रुख ने संसद के भीतर विभाजन को उजागर कर दिया।

इसी कड़ी में, परमाणु मुद्दे को वार्ता में शामिल करने की कोशिशों पर विवाद बढ़ने के बाद स्पीकर गलीबाफ के इस्तीफे की खबर भी सामने आई।

इसके बाद अराघची ने खुद वार्ता की कमान संभालने की कोशिश की और 24 अप्रैल को अकेले इस्लामाबाद जाकर एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया।

सुप्रीम लीडर सक्रिय, वार्ता-अभियानों पर सीधा नियंत्रण

सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और सक्रिय रूप से कामकाज संभाल रहे हैं। फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से विशेषज्ञों की सभा के सदस्य और खामेनेई कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप प्रमुख अयातुल्ला मोहसेन कोमी ने इसकी पुष्टि की है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मोजतबा इस समय वार्ता प्रक्रिया और जमीनी स्तर पर चल रहे अभियानों की सीधे निगरानी कर रहे हैं।

हाल के दिनों में उन्होंने वार्ता दल को अलग-अलग परिस्थितियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश भी दिए हैं।कोमी ने अमेरिका के उन दावों को सिरे से खारिज किया, जिनमें खामेनेई की स्थिति और उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।

उन्होंने कहा कि इस तरह के सवाल जानबूझकर उठाए जाते हैं, ताकि लोगों का ध्यान भटकाया जा सके और उनका मनोबल कमजोर किया जा सके।

उन्होंने कहा, “दुश्मन यह पूछता है कि सुप्रीम लीडर क्यों नजर नहीं आ रहे, वे आडियो-वीडियो संदेश क्यों नहीं दे रहे या जनता के बीच क्यों नहीं जा रहे। ऐसे सवालों का मकसद सिर्फ हमें प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाना है, ताकि वे अपने लक्ष्य हासिल कर सकें।”

किया अहम खुलासा

कोमी ने एक अहम खुलासा करते हुए बताया कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा सुप्रीम लीडर के आवासीय परिसर को निशाना बनाए जाने के वक्त मोजतबा खामेनेई उसी इमारत में मौजूद थे। हालांकि हमले से कुछ मिनट पहले ही वे आंगन की ओर चले गए थे, जिससे वे सुरक्षित बच निकले।

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