री-नीट का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर 1000 से ज्यादा छात्रों से लाखों की ठगी, पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार…

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने सोमवार को राजस्थान के दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है जो एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी का नेटवर्क चला रहे थे। यह नेटवर्क छात्रों और उनके माता-पिता को री-नीट एग्जाम के प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का झूठा वादा करता था और फिर उनसे पैसे ठगता था।

जांच में सामने आया है कि एक हजार से अधिक छात्रों से ठगी की गई है। पुलिस ने आरोपित जयपुर निवासी सुमेर सिंह मीणा और कोटा के निवासी आकाश मीणा को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आइटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आईएएनएस के अनुसार, अहमदाबाद पुलिस के संयुक्त आयुक्त (अपराध) शरद सिंघल ने कहा कि री-नीट परीक्षा का कोई प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि आरोपितों ने टेलीग्राम पर बनाए गए ग्रुपों के माध्यम से यह दर्शाया कि उनके पास 21 जून को होने वाली नीट-यूजी की फिर से होने जा रही परीक्षा का प्रश्न पत्र है और इसी के नाम पर उन्होंने छात्र से धन ऐंठा।

उन्होंने कहा कि इंटरनेट मीडिया चैनलों का इस्तेमाल झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए किया गया और फिर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। प्रेट्र के अनुसार, आरोपितों के विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से लगभग 1.50 करोड़ रुपये के लेन-देन किए जाने की जानकारी मिली है।

जांच में यह भी पाया गया कि आरोपित टेलीग्राम चैनलों और ” ट्रेड विद कारोल” और “पंकज भारद्वाज” नामक ग्रुपों के जरिये निवेश से संबंधित साइबर धोखाधड़ी में भी शामिल थे। ये ग्रुप लोगों को हाई रिटर्न का वादा करके निवेश करने के लिए लुभाते थे और उनसे ठगी करते थे।

नीट-यूजी के छात्रों के रिफंड की ठगी की बड़ीसाजिश नाकाम, बिहार से युवक गिरफ्तारअहमदाबाद से आइएएनएस के अनुसार : अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच और एनटीए ने मिलकर नीट-यूजी 2026 के छात्रों को निशाना बनाने वाली साइबर धोखाधड़ी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम किया है और इस मामले में बिहार के गया जिला के निवासी 19 वर्षीय नवीन कुमार यादव को गिरफ्तार किया है।

बीएससी पास आरोपित परीक्षा फीस रिफंड के पैसे को छात्रों के खातों से उड़ाकर अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करने की कोशिश कर रहा था। उसने कमजोर पासवर्ड और पासवर्ड रिकवरी सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर नीट उम्मीदवारों के पोर्टल अकाउंट्स का अनधिकृत एक्सेस हासिल किया। एनटीए के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी द्वारा दी गई डिजिटल कड़ियों, तकनीकी जांच और बैंक खातों के रिकार्ड के आधार पर पुलिस ने आरोपी को बिहार से ढूंढ निकाला।

जांच में सामने आया कि आरोपित ने एक छात्र की जानकारी का इस्तेमाल करके एक फर्जी आइडी बनाई। इसके बाद उसने उस छात्र की जानकारी के बिना नीट-यूजी 2026 के आनलाइन पोर्टल पर गलत तरीके से लागिन कर लिया। लागिन करने के बाद उसने उन छात्रों को चुना जो फीस रिफंड के हकदार थे और उनके बैंक अकाउंट की जगह अपना अकाउंट नंबर डाल दिया ताकि रिफंड का पैसा सीधे उसके अपने बैंक खातों में आ जाए।

पुलिस अधिकारी शरद सिंघल ने कहा कि यह मामला तब सामने आया जब सरकार ने नीट परीक्षा के रद होने के बाद 1,700 रुपये के रिफंड की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आरोपित ने करीब 350 नीट उम्मीदवारों के अकाउंट्स को निशाना बनाया था। इनमें से लगभग 150 अकाउंट्स ऐसे थे जिनका पासवर्ड बहुत कमजोर था और इसी काफायदा उठाकर आरोपित ने उनमें आसानी से सेंध लगा दी।

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