पीएम मोदी की मंत्रियों को नसीहत: ‘सभी पात्र लोगों तक पहुंचाएं सरकारी लाभ, समाज के लिए करें काम’…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों के साथ ‘चिंतन शिविर’ के पहले दिन शासन और प्रशासनिक सुधार पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी और महिलाओं व युवाओं तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। 2047 तक विकसित भारत बनाने की प्राथमिकताओं पर भी मंथन हुआ।

सूत्रों ने बताया कि सेवा तीर्थ में चार घंटे से अधिक चली बैठक में मंत्रियों ने इस बात पर चर्चा की कि अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल के जरिये सरकार के कामकाज को और कैसे बेहतर बनाया जाए।

मंत्रियों को आठ समूहों में बांटा गया था और प्रधानमंत्री मोदी ने हर समूह के साथ बातचीत की। बताया जा रहा है कि मोदी ने मंत्रियों से फीडबैक लिया और उन्हें सरकार के कामकाज के अलग-अलग पहलुओं पर सलाह दी।

सूत्रों के मुताबिक, दो दिन तक चलने वाले इस मंथन का उद्देश्य कामकाज का जायजा लेना, तालमेल बेहतर करना, भविष्य का एजेंडा और प्लानिंग तैयार करना तथा कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर चल रहे काम की समीक्षा करना है। इस तरह के सम्मेलन के जरिये सरकार के अलग-अलग पहलुओं का जायजा लेने की प्रक्रिया अगले सप्ताह भी जारी रहने की उम्मीद है।

विकसित भारत को लेकर प्रयास 2021 से चल रहा है। इस सिलसिले में अल्पकालिक और दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने के लिए सचिवों के 10 समूह बनाए गए हैं। इस मुहिम के तहत संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श भी किया गया। तब से ‘विकसित भारत@2047’ के विभिन्न पहलुओं पर मंत्रिपरिषद के समक्ष आठ प्रजेंटेशन और चर्चाएं हो चुकी हैं।

मौजूदा ‘चिंतन शिविर’ इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। यह सचिवों के समूहों, मंत्रालयों और विभागों, कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग द्वारा किए जा रहे कार्यों को एक साथ लाएगा। इन कार्यों में प्रशासनिक सुधार, जीवन की सुगमता, नियमों का बोझ कम करना और गवर्नेंस से जुड़ी दूसरी प्राथमिकताएं शामिल हैं।

सरकारी योजनाओं की प्रगति, नीति लागू करना, समय का प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच तालमेल और सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे मुद्दे इस सम्मेलन के एजेंडे में शामिल हैं।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब राजनीतिक हलकों में कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, सरकार की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि चिंतन शिविर का संबंध किसी फेरबदल से है।

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