पीएम मोदी की ऐतिहासिक विदेश यात्राओं ने वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान बनाई है।
जिससे दुनियाभर में भारत की भूमिका और कूटनीतिक पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है। करीब 43 वर्षों के बाद ये पहला मौका है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की धरती पर कदम रखा है। इससे पहले जून 1983 में इंदिरा गांधी ने नॉर्वे का दौरा किया था।
भारत सरकार के आधिकारिक नागरिक मंच ‘मायगव’ (MyGov) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्जीवित किया है, जहां दशकों से किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने कदम नहीं रखा था।
पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों की ऐसी यात्राएं कीं, जो आज तक के इतिहास में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नहीं की थीं। आइए जानते हैं पीएम मोदी की किन-किन देशों की यात्राएं ऐतिहासिक रहीं।
नार्वे- साल 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नॉर्वे दौरा बेहद ऐतिहासिक रहा, जो पूरे 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा किया गया।
क्रोएशिया- साल 2025 में क्रोएशिया जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।
पापुआ न्यू गिनी- साल 2023 में इस प्रशांत द्वीपीय देश की यात्रा करने वाले पहले भारतीय पीएम बनकर नया इतिहास रचा।
इजरायल- साल 2017 इजरायल का दौरा करने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री बने, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक संबंध एक नए स्तर पर पहुंचे।
पीएम मोदी ने दुनिया के विभिन्न कोनों में दशकों से ठप पड़े कूटनीतिक दौरों को फिर से शुरू किया-
यूरोप में नया कूटनीतिक मोड़
पोलैंड की 45 साल बाद (2024), ऑस्ट्रिया की 41 साल बाद (2024), ग्रीस की 40 साल बाद (2023), और साइप्रस की 23 साल बाद (2025) यात्रा की गई। इसके अलावा, 30 वर्षों के अंतराल के बाद स्वीडन (2018) और 20 वर्षों बाद डेनमार्क (2022) का दौरा हुआ।
अफ्रीका और मध्य पूर्व से मजबूत रिश्ते
गुयाना की 56 साल बाद (2024), नाइजीरिया की 17 साल बाद (2024), मिस्र की 26 साल बाद (2023) और युगांडा की 21 साल बाद (2018) यात्रा की गई। वहीं, मोजाम्बिक (2016) की 34 साल बाद, केन्या (2016) की 35 साल बाद और जॉर्डन (2018) की 30 साल बाद यात्रा संपन्न हुई।
वैश्विक महाशक्तियों और रणनीतिक साझेदारों तक पहुंच
आयरलैंड की 60 वर्षों के बाद (2015), कनाडा की 42 वर्षों के बाद (2015), फिलीपींस की 36 वर्षों के बाद (2017), यूएई (UAE) की 34 वर्षों के बाद (2015), सेशेल्स की 33 वर्षों के बाद (2015) और ऑस्ट्रेलिया की 28 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद (2014) ऐतिहासिक यात्रा की गई।
वैश्विक मंच पर बढ़ रही भारत की भूमिका
गौरतलब है कि पीएम मोदी इन दौरों का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि व्यापार, रक्षा, तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की हिस्सेदारी को बढ़ाना है। जिससे विश्व मंच पर भारत की भूमिका लगातार और मजबूत होती जा रही है।