आयात कम करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकस, बोले पीयूष गोयल…

वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाकर आयात बिल को कम करने के लिए कई प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है।

कैपिटल गुड्स, केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई आइटम के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने को लेकर उद्यमियों के साथ लगातार बैठक हो रही है और इस दौरान कई प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई है।

मंत्रालय उन सभी वस्तुओं की पहचान कर रहा है जिनकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाया जा सकता है ताकि आयात को कम किया जा सके। मंत्रालय की साइट पर इस प्रकार के सभी आइटम की विस्तृत जानकारी दी जाएगी ताकि उद्यमियों को निवेश में आसानी हो।

देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर जोर

भारत कैपिटल गुड्स, मशीन टूल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रांसपोर्ट उपकरण जैसे आइटम का 250 अरब डॉलर से अधिक का सालाना आयात करता है। रुपए में कमजोरी को ध्यान में रखते हुए सरकार आयात बिल कम करने का प्रयास कर रही है।

गोयल ने बताया कि इस साल अप्रैल की तरह ही मई के पहले तीन सप्ताह में भी निर्यात में बढ़ोतरी का रुख दिख रहा है। इस साल अप्रैल में वस्तु निर्यात में पिछले साल अप्रैल की तुलना में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 95 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) आया है जो पूर्व के वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 17 प्रतिशत अधिक है। सर्विस सेक्टर भी लगातार मजबूत हो रहा है। सभी प्रमुख विकसित देशों से व्यापार समझौते हो चुके हैं या होने वाले हैं और इससे भी निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है।

आर्थिक बुनियाद मजबूत होने की वजह से वैश्विक संकट के इस काल में भी दुनिया निवेश के लिए भारत की ओर देख रही है। इसलिए आने वाले वर्षों में भी विदेशी निवेश में बढ़ोतरी जारी रहेगी। यह दर्शाता है कि पश्चिम एशिया संकट से विश्व भले दिक्कत में हो, भारत का विकास लगातार जारी है।

विभिन्न वैश्विक एजेंसियों ने गत वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च) में भी विकास दर सात प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना जाहिर की है।गोयल ने बताया कि निवेश को लेकर भारत के प्रति दुनिया का आकर्षण कोई एक दिन में नहीं बना है।

पिछले 12 सालों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ कारोबारी नियम को सरल करने व अन्य आर्थिक फैसलों की वजह से भारत निवेश के लिए पसंदीदा जगह बन गया है। गोयल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद किसानों को दी जाने वाली खाद की कीमत में बढ़ोतरी नहीं की गई है।

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