विदेश मंत्री एस. जयशंकर और यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के बीच गुरुवार को फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।
सिबिहा ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अच्छी बातचीत की। दोनों ने हाल के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों पर अपडेट का आदान-प्रदान किया।
काला सागर में जहाजों पर हमले की चर्चा
सिबिहा ने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की हालिया वाशिंगटन यात्रा के नतीजों की जानकारी दी। सिबिहा ने जोर दिया कि रूसी आक्रामकता के परिणाम यूक्रेन की सीमाओं से कहीं आगे तक फैले हुए हैं।
काला सागर में नागरिक जहाजों पर हमला करके रूस नौवहन की स्वतंत्रता को कमजोर कर रहा है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है।
साथ ही, यह युद्ध वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता पैदा कर रहा है, जिसका असर क्षेत्र से दूर के देशों पर भी पड़ रहा है। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने स्थायी और व्यापक शांति हासिल करने के यूक्रेन के संकल्प को दोहराया तथा भारत से शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। दोनों पक्ष निकट संपर्क में रहने पर सहमत हुए।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर चिंता
जयशंकर ने भी इस बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने काला सागर में वाणिज्यिक शिपिंग और भारतीय नाविकों पर हो रहे हमलों पर चर्चा की।उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी पक्ष द्वारा ऐसे हमले बिल्कुल अस्वीकार्य हैं और भारत इनकी स्पष्ट निंदा करता है।
उन्हें यूक्रेन संघर्ष और शांति वार्ताओं से जुड़े हालिया घटनाक्रमों की जानकारी दी गई। भारत ने लगातार संबंधित पक्षों के बीच संवाद और कूटनीति की वकालत की है।
जयशंकर ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति की नाजुकता पर भी प्रकाश डाला, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में कई संघर्ष चल रहे हैं। ये संघर्ष ईंधन, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं, खासकर विकासशील व गरीब देशों को।
दोनों ने संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। यह बातचीत उस पृष्ठभूमि में हुई है जब काला सागर क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के कारण भारतीय नाविकों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। भारत ने पहले भी दोनों पक्षों से ऐसे हमलों पर अपनी चिंता जताई है।