संसदीय स्थायी समिति ने सरकारी प्रयासों के बावजूद परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएं सामने आने पर चिंता जताई है और शिक्षा मंत्रालय से उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए समयबद्ध रोडमैप सार्वजनिक करने को कहा है।
राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने मंगलवार को उच्च शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों (2025-26) पर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन को सौंपी।
एनटीए में सुधार की जरूरत बतानेवाले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान का समर्थन करते हुए समिति ने एनटीए से पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को तेजी से लागू करने को कहा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि सुधारात्मक कदम उठाए जाने के बावजूद प्रश्नपत्र संबंधी अनियमितताएं जारी हैं, जिसके कारण परीक्षाएं रद करनी पड़ रही हैं और छात्रों में चिंता बढ़ रही है।
समिति ने सभी संबंधित पक्षों से व्यापक परामर्श कर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ‘फूलप्रूफ’ व्यवस्था विकसित करने की भी सिफारिश की।
समिति ने यह भी कहा कि कई कंपनियां एक राज्य या संस्था द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद अन्य राज्यों व संस्थाओं से ठेके हासिल कर लेती हैं। इसे रोकने के लिए ब्लैकलिस्टेड कंपनियों की राष्ट्रीय सूची तैयार की जानी चाहिए।
एनटीए की वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए समिति ने कहा कि पिछले छह वर्षों में एजेंसी ने 3,512.98 करोड़ रुपये की आय के मुकाबले 3,064.77 करोड़ रुपये खर्च किए और 448 करोड़ रुपये का अधिशेष अर्जित किया। समिति ने सुझाव दिया कि इस राशि का उपयोग परीक्षा संचालन और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने में किया जाए।
सीयूईटी के प्रारूप और प्रश्नपत्र गुणवत्ता की समीक्षा हो
संसदीय समिति ने कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) को लेकर भी चिंता जताई है। समिति का मानना है कि बहुविकल्पीय प्रश्न (एमसीक्यू) आधारित प्रारूप मानविकी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं हो सकता।
रिपोर्ट में कहा गया कि समिति के कुछ सदस्य स्नातक प्रवेश के लिए सीयूईटी को सार्वभौमिक माध्यम बनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप सीयूईटी के प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और परीक्षा डिजाइन की व्यापक समीक्षा करने की सिफारिश की है।